सुबह सस्ती तो रात में महंगी हो जाएगी...बिहार में बिजली को लेकर बन गए कौन से नए नियम?

बिहार में दिन में सस्ती और शाम के बाद महंगी बिजली के पीछे विद्युत विनियामक आयोग की ओर से टाइम ऑफ डे टैरिफ को मंजूर करना वजह है. बिजली कंपनी की याचिका पर आयोग ने मंजूरी दे दी है.

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  • बिहार सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए दिन और रात में अलग-अलग बिजली दरें लागू की हैं
  • शाम पांच बजे से रात ग्यारह बजे तक घरेलू उपभोक्ताओं से बिजली शुल्क में बीस प्रतिशत तक वृद्धि होगी
  • रात ग्यारह बजे से सुबह नौ बजे तक बिजली की दर सामान्य से सौ प्रतिशत अधिक लागू रहेगी
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नई दिल्ली:

बिहारवालो बिजली बिल पर नया अपडेट आया है. प्रदेश में बिजली को लेकर नए नियम जारी हो गए हैं. अब दिन में जहां बिजली सस्ती रहेगी तो शाम और रात में यह महंगी हो जाएगी. सरकार ने शाम को उपभोक्ताओं से अधिक शुल्क वसूलने की तैयारी की है. नीतीश सरकार का ये आदेश उन उपभोक्ताओं पर लागू होगा जिनके घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा हुआ है.   

इस मंजूरी के बाद बदल गईं दरें 

बिहार में दिन में सस्ती और शाम के बाद महंगी बिजली के पीछे विद्युत विनियामक आयोग की ओर से टाइम ऑफ डे टैरिफ को मंजूर करना वजह है. बिजली कंपनी की याचिका पर आयोग ने मंजूरी दे दी है. पहले यह औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए थी और अब यह आमजनों के लिए भी लागू कर दिया गया है. इस नए फॉर्मूले के बाद बिहार में शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक 20 फीसदी तक अधिक शुल्क लिया जाएगा. 

क्या है नया सिस्टम?

सरकार ने दिन को तीन हिस्सों में बांटा है, और हर समय के लिए अलग-अलग बिजली दर तय की गई हैं-

सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे (ऑफ-पीक आवर)

➔यह समय सबसे सस्ता होगा
➔उपभोक्ताओं को सामान्य दर का लगभग 80% ही भुगतान करना होगा यानी करीब 20% की छूट मिलेगी 

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मतलब: कपड़े धोना, प्रेस करना, पानी का पंप चलाना या इंडक्शन जैसे भारी उपकरण इसी समय चलाना फायदेमंद रहेगा

शाम 5 बजे से रात 11 बजे (पीक आवर)

➔यह समय सबसे महंगा होगा।
➔घरेलू उपभोक्ताओं को 10% अधिक शुल्क देना होगा
➔गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को 20% तक अधिक शुल्क

यही समय है जब ज्यादातर लोग घर पर होते हैं और बिजली की खपत बढ़ जाती है, इसलिए दरें बढ़ाई गई हैं.

रात 11 बजे से सुबह 9 बजे (सामान्य समय)

➔इस दौरान सामान्य दर ही लागू रहेगी, न ज्यादा शुल्क, न कोई छूट

कितना बदलेगा आपका बिल?

➔उदाहरण के तौर पर बेस दर ₹7.42 प्रति यूनिट
➔ऑफ-पीक में करीब ₹5.94 प्रति यूनिट (20% कम)
➔पीक में करीब ₹8.16 प्रति यूनिट (10% ज्यादा)
यानी अगर आप अपनी खपत को सही समय पर शिफ्ट करते हैं, तो बिल में अच्छी बचत हो सकती है.

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किन उपभोक्ताओं पर लागू होगा?

➔स्मार्ट प्रीपेड मीटर (SPM) वाले उपभोक्ता
➔10 किलोवाट से अधिक लोड वाले कनेक्शन
➔घरेलू और गैर-घरेलू दोनों श्रेणियां

बिहार में कुल 2 करोड़ 21 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से बड़ी संख्या इस बदलाव से प्रभावित होगी।

सरकार का मकसद क्या है?

इस नए सिस्टम के पीछे सरकार का उद्देश्य है कि पीक टाइम में बिजली की खपत कम करना, ग्रिड पर दबाव घटाना, ऊर्जा का बेहतर प्रबंधन करना.दरअसल, शाम के समय बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है. ऐसे में महंगी दरें लगाकर लोगों को दिन में बिजली इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

यह कदम लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आम लोग अपनी आदतें कितनी बदल पाते हैं.ग्रामीण और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए दिन में भारी उपकरण चलाना हमेशा संभव नहीं होता, खासकर नौकरीपेशा लोगों के लिए. ऐसे में शाम के पीक आवर में महंगी बिजली उनके बजट पर असर डाल सकती है. दूसरी ओर, जो लोग अपने उपयोग को प्लान कर सकते हैं, वे इस सिस्टम से अच्छा-खासा पैसा बचा सकते हैं.

बिहार में लागू हो रहा यह नया बिजली टैरिफ सिस्टम एक तरह से स्मार्ट यूज को बढ़ावा देने की कोशिश है. अब यह उपभोक्ताओं पर निर्भर करेगा कि वे अपने इस्तेमाल को कैसे मैनेज करते हैं क्योंकि सही समय पर बिजली चलाने से ही असली बचत संभव है.

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