25 साल में मंत्री बनने से CM की कुर्सी तक... जानिए बिहार के नए 'चौधरी' बने सम्राट के बारे में सबकुछ

Samrat Choudhary : सम्राट चौधरी पहली बार वर्ष 2000 में विधायक बने थे. उन्होंने बिहार के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से राजद (RJD) के टिकट पर चुनाव जीता था.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को सत्ता सौंपा जाएगा.
  • सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से हैं और उनका राजनीतिक सफर 2000 में राजद के विधायक के रूप में शुरू हुआ था.
  • उन्होंने 2014 में जेडीयू में शामिल होकर 2017 में बीजेपी का दामन थामा और वहां से उनका राजनीतिक ग्राफ बढ़ा.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है, जहां करीब दो दशकों से चले आ रहे 'नीतीश युग' का आधिकारिक रूप से अंत हो गया है. मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब राज्य की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में सौंप दी जाएगी. सत्ता के इस बड़े परिवर्तन ने न केवल बिहार के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है, बल्कि एक नए नेतृत्व की शुरुआत का संकेत भी दिया है. सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार भाजपा के बढ़ते वर्चस्व और राज्य की सियासत में एक नए अध्याय के आगाज के रूप में देखा जा रहा है.

कुशवाहा समाज से आते हैं सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी के पिता, शकुनी चौधरी एक सैन्यकर्मी से राजनेता बने थे, जिन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की और अक्सर कट्टर प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के पार्टी में आते-जाते रहे. सम्राट चौधरी पहली बार वर्ष 2000 में विधायक बने थे. उन्होंने बिहार के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से राजद (RJD) के टिकट पर चुनाव जीता था.सम्राट RJD सुप्रीमो की पत्नी राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री थे, उस समय उसकी उम्र 25 बर्ष थी और 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद काफी समय तक पार्टी के साथ रहे. सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं. उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में हुआ था.

जब जेडीयू से हुआ था सम्राट का मोहभंग

सम्राट चौधरी 2014 में एक विद्रोही गुट का हिस्सा बनकर जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली जेडीयू सरकार में शामिल हुए थे. हालांकि, तीन साल बाद उनका जेडीयू से मोहभंग हो गया और वे बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने कोइरी समाज से जुड़े एक प्रभावशाली नेता के रूप में सम्राट चौधरी की क्षमता को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ाया. उन्हें मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे करने के पीछे लव (कुर्मी) और कुश (कुशवाहा) यानी ओबीसी वोट बैंक की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. पार्टी ने पहले उन्हें बीजेपी की राज्य इकाई का उपाध्यक्ष बनाया और फिर विधान परिषद में भेजा. 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद वे नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बने. इसके बाद पिछले साल मार्च में उन्हें लोकसभा सांसद संजय जायसवाल की जगह राज्य भाजपा अध्यक्ष नियुक्त किया गया.

Advertisement

सम्राट चौधरी की राजनीतिक पहचान का आधार मुंगेर की वह धरती है, जहां से उनके पिता शकुनी चौधरी ने सत्ता का लंबा सफर तय किया था. मूल रूप से मुंगेर जिले के तारापुर अंतर्गत लखनपुर गांव के रहने वाले सम्राट आज भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े हैं. मुंगेर, जिसका ऐतिहासिक प्रभाव बेगूसराय, खगड़िया और लखीसराय तक रहा है, वहां सम्राट को 'अपना नेता' माना जाता है

नीतीश की पसंद और 'लव-कुश' समीकरण की मजबूती

बिहार की सत्ता में 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी) समीकरण हमेशा से निर्णायक रहा है. जहां नीतीश कुमार कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं सम्राट चौधरी कोइरी (कुशवाहा) समाज के सबसे प्रखर चेहरे के रूप में उभरे हैं. कभी नीतीश को सत्ता से बेदखल करने के लिए मुरेठा (पगड़ी) बांधने वाले सम्राट आज भाजपा की ओर से बिहार के मुख्यमंत्री होंगे.

Advertisement

2020 के जनादेश के बाद जब समीकरण बदले, तो सम्राट और नीतीश की यह जोड़ी बिहार की राजनीति की धुरी बन गई. भाजपा के लिए सम्राट चौधरी वह चेहरा साबित हुए जिन्होंने न केवल अपने समाज को जोड़ा, बल्कि नीतीश कुमार के भरोसेमंद साथी के रूप में भी खुद को स्थापित किया. सम्राट चौधरी का राजनीतिक ग्राफ पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से बढ़ा है. अपने करियर का बड़ा हिस्सा राजद के साथ बिताने और राबड़ी देवी सरकार में मंत्री रहने के बावजूद, 2018 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

ये भी पढ़ें :  बिहार में 'नीतीश युग' का अंत, लोकभवन में राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा

Featured Video Of The Day
बिहार की नई सरकार के शपथग्रहण पर बड़ी खबर, सम्राट चौधरी बनेंगे CM?