बिहार विधान परिषद चुनाव: 10 सीटों पर जोरदार मुकाबला, निशांत कुमार-लाजवंती झा समेत इन नामों पर सबकी नजर

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होना है. इसमें NDA मजबूत स्थिति में दिख रहा है. जदयू‑भाजपा में कई दावेदारों के नाम चर्चा में हैं, जबकि राजद से सुनील सिंह की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है. बता दें कि इस चुनाव के नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है.

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पटना:

बिहार में विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है. 9 सीटों का कार्यकाल खत्म होने और एक सीट नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से खाली होने के कारण यह चुनाव हो रहा है. मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के आधार पर NDA का दबदबा साफ दिख रहा है, जहां 9 सीटों पर उसकी जीत की संभावना जताई जा रही है, जबकि एक सीट राजद के खाते में जा सकती है. हालांकि, NDA सभी 10 सीटें जीतने की रणनीति में जुटा है.

क्या है सीटों का गणित?

फिलहाल इन 10 सीटों में 5 सीटें जदयू के पास, 2 सीटें भाजपा के पास, 2 सीटें राजद और 1 सीट कांग्रेस की है. लेकिन नए समीकरण के मुताबिक जदयू को 4 सीट, भाजपा को 3 सीट, लोजपा को 1 सीट, राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 1 सीट और राजद को 1 सीट मिलने के आसार हैं. यानी विपक्ष को नुकसान होता दिख रहा है.

जदयू: निशांत कुमार से मुस्लिम चेहरे तक चर्चा

जदयू खेमे में कई नाम चर्चा में हैं. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम लगभग तय माना जा रहा है. इनके अलावा मुस्लिम प्रतिनिधित्व के तौर पर मजबूत दावेदारी अंजुम आरा की मानी जा रही है. वहीं तारापुर के पूर्व विधायक राजीव कुमार सिंह  को भी भेजा जा सकता है.  

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इनके अलावा राजपूत समीकरण साधते हुए वशिष्ठ नारायण सिंह के बेटे प्रशांत सिंह को भी जदयू उतार सकती है. वहीं लंबे समय से संगठन से जुड़े धानुक जाति से आने वाले ललन प्रसाद का नाम भी तय माना जा रहा है. 

भाजपा: जातीय संतुलन और नए चेहरे पर जोर

भाजपा भी इस बार नए चेहरों पर दांव लगा सकती है. संभावित नामों में पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष लाजवंती झा, प्रदेश महामंत्री राजेश वर्मा, पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल को उतार सकती है. इसके अलावा संजय मयूख का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. लेकिन विधानसभा की ओर रुख कर सकते हैं. इन चुनावों में पार्टी सवर्ण, पिछड़ा और महिला समीकरण साधने की कोशिश में है.

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लोजपा और अन्य सहयोगी दलों पर भी नजर

लोजपा से वेद प्रकाश पांडे सबसे आगे बताए जा रहे हैं. बाहुबली नेता हुलास पांडे का नाम भी चर्चा में है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा से दीपक प्रकाश का जाना लगभग तय है, वे अभी मंत्री हैं लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं हैं.

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राजद: सुनील सिंह फिर उम्मीदवार?

राजद एक ही सीट जीतने की स्थिति में दिख रही है. ऐसे में सुनील सिंह का नाम सबसे आगे है. वे लालू परिवार के करीबी और सदन में मुखर नेता माने जाते हैं, इसलिए पार्टी उन्हें रिपीट कर सकती है.

अभी और तेज होगी दौड़

नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून तय की गई है. पार्टियां औपचारिक घोषणा जून में करेंगी, लेकिन तब तक दावेदारों की दौड़ और लॉबिंग तेज रहने वाली है.

राजनीतिक संदेश क्या?

यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि जातीय संतुलन, संगठन में पकड़ और भविष्य की राजनीति का संकेत भी देगा. NDA जहां दबदबा बनाए रखना चाहती है, वहीं विपक्ष सीमित संसाधनों में अपनी मौजूदगी बचाने की कोशिश करेगा.

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