- बिहार के फ्लोर टेस्ट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार की स्थिरता और विपक्ष के एकजुट होने की परीक्षा होगी.
- फरवरी के फ्लोर टेस्ट में RJD के कई विधायक NDA खेमे में चले जाने से महागठबंधन की साख को बड़ा झटका लगा था.
- राज्यसभा चुनाव में भी महागठबंधन के 3 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की.
बिहार विधानसभा में होने वाला फ्लोर टेस्ट सिर्फ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के भरोसे का इम्तिहान नहीं है, बल्कि यह दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए कहीं ज्यादा अहम माना जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महागठबंधन के विधायक इस बार भी साथ निभाएंगे या फिर ‘खेला' दोहराया जाएगा?
पिछले अनुभवों ने बढ़ाई तेजस्वी की चिंता
तेजस्वी यादव के लिए यह डर बेवजह नहीं है. 12 फरवरी 2024 के पिछले फ्लोर टेस्ट के दौरान तेजस्वी ने सदन के बाहर ‘खेला होने' का आरोप लगाया था, लेकिन हकीकत यह रही कि RJD के कई विधायक (चेतन आनंद, नीलम देवी, और प्रहलाद यादव) पाला बदलकर NDA खेमे में चले गए. इससे न सिर्फ सरकार गिराने की कोशिश नाकाम हुई, बल्कि महागठबंधन की राजनीतिक साख को भी गहरा झटका लगा.
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राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी को लगा झटका
इसके बाद राज्यसभा चुनाव में भी RJD और महागठबंधन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा. कांग्रेस के तीन और राजज के एक विधायक ने क्रॉस वोटिंग कर दी या सदन में मौजूद नहीं रहे, जिससे यह संदेश गया कि तेजस्वी अपने गठबंधन के विधायकों को एकजुट रखने में सफल नहीं हो पा रहे हैं.
| पार्टी | विधायकों की संख्या |
| आरजेडी | 25 |
| कांग्रेस | 6 |
| सीपीआईएमएल | 2 |
| सीपीआईएम | 1 |
| आईआईपी | 1 |
| कुल | 35 |
सिमटा हुआ महागठबंधन, बढ़ता दबाव
इस बार स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है. महागठबंधन सिर्फ 35 विधायकों तक सिमटा हुआ है. इतनी कम संख्या में हर एक विधायक की अहमियत कई गुना बढ़ जाती है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, तेजस्वी यादव के सामने इस फ्लोर टेस्ट में सरकार गिराने का लक्ष्य प्राथमिक नहीं है, बल्कि अपने विधायकों को टूटने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है.
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अगर एक बार फिर RJD या महागठबंधन के विधायक NDA की ओर जाते हैं, तो इसका असर सिर्फ इस विधानसभा सत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता और 2025 की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर देगा.
क्यों अहम है आज का दिन
NDA के पास पहले से ही भारी बहुमत है, इसलिए सम्राट चौधरी की सरकार का भरोसा जीतना लगभग तय माना जा रहा है. ऐसे में सदन के भीतर असली मुकाबला संख्या का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का है. अगर महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट दिखते हैं, तो तेजस्वी को यह कहने का मौका मिलेगा कि उन्होंने पार्टी में अनुशासन कायम कर लिया है. लेकिन अगर एक भी विधायक टूटता है, तो विपक्ष की कमजोर होती पकड़ फिर उजागर हो जाएगी.
नजरें तेजस्वी की रणनीति पर
आज का फ्लोर टेस्ट तय करेगा कि तेजस्वी यादव सिर्फ आक्रामक विपक्षी नेता हैं या फिर विधायकों को संभालकर रखने वाले मजबूत रणनीतिकार भी. बिहार की सियासत में इसलिए यह कहा जा रहा है कि यह फ्लोर टेस्ट सरकार की मजबूरी है, लेकिन तेजस्वी की राजनीतिक अग्निपरीक्षा है.













