Bihpur Election Result: बिहपुर में फिर खिला कमल, कुमार शैलेंद्र ने 30 हजार वोटों से हासिल की जीत

बीजेपी के कुमार शैलेंद्र एक बार फिर जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने वीआईपी पार्टी की कुमारी अर्पणा को 30 हजार से अधिक वोटों से मात दी है.

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बिहार विधानसभा चुनाव में भागलपुर की बिहपुर सीट से बीजेपी के कुमार शैलेंद्र एक बार फिर जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं. उन्होंने वीआईपी पार्टी की कुमारी अर्पणा को 30 हजार से अधिक वोटों से मात दी है. जन सुराज पार्टी के पवन चौधरी तीसरे नंबर पर रहे हैं. बिहपुर विधानसभा में इस बार 65.58 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी.

बिहपुर सीट बिहार के भागलपुर ज़िले के अंतर्गत आती है, जो कुल सात विधानसभा सीटों वाला ज़िला है. यह एक सामान्य (General) सीट है. इस क्षेत्र की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह गंगा और कोसी नदियों से घिरा हुआ है. इसके कारण यहां की राजनीति पर हर साल आने वाली बाढ़ और कटाव की समस्या का गहरा असर रहता है. 

प्रत्याशीपार्टीवोट मिले
कुमार शैलेंद्रबीजेपी91458 
अपर्णा कुमारीवीआईपी61433 
पवन चौधरीजन सुराज8821 
ममता कुमारीनिर्दलीय8821 
नोटा3269 

 पिछली हार-जीत का हिसाब

बिहपुर सीट पर पिछले चार चुनावों से सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच रहा है. इनके बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली है. 2020 में कुमार शैलेन्द्र (बीजेपी) ने 6,129 मतों से जीत हासिल की थी. उन्होंने शैलेश मंडल (राजद) को हराया था. उससे पहले 2015 में वर्षा रानी (राजद) को 12,716 मतों से जीत मिली थी. 2010 में कुमार शैलेन्द्र (बीजेपी) महज 465 मतों के अंतर से विधायक बने तो 2005 में शैलेश कुमार (राजद) ने 442 मतों से जीत हासिल की थी. 

क्या प्रमुख मुद्दे 

  • बिहपुर की राजनीति में भौगोलिक चुनौतियों और जातीय ध्रुवीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. 
  • बाढ़ और कटाव बिहपुर का केंद्रीय मुद्दा है. नदियों के तेज कटाव के कारण कई गांवों की उपजाऊ भूमि नष्ट हो गई है. 
  • स्थानीय निवासियों की मुख्य मांग कटाव पीड़ितों के प्रभावी पुनर्वास और कटाव से बचाव के स्थायी उपायों को लेकर है.
  • क्षेत्र में बड़े उद्योगों की कमी से रोज़गार का अभाव है, जिसके चलते शिक्षित युवाओं का पलायन एक निरंतर चुनौती है.

वोटों का गणित और जातीय समीकरण

बिहपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 2.95 लाख है. सामाजिक समीकरणों की दृष्टि से यह सीट काफी विविधतापूर्ण है. जातीय आंकड़ों के अनुसार यहां पर ओबीसी, दलित और मुस्लिम मतदाता मिलकर 65% से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो यहां के चुनावी परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं.

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