बिहार के इस गांव में शिक्षा की राह मुश्किल! स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे बच्चे

Bihar News: स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस गंभीर समस्या को लेकर संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों के सामने उठाया. आवेदन, ज्ञापन और मौखिक शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है, इससे ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा दोनों हैं.

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बिहार के रोहतास में शिक्षा की राह कठिन.
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  • बिहार के हरिवंशपुर पंचायत के प्राथमिक स्कूल तक बच्चों के जाने के लिए अब तक पक्की सड़क और पुल नहीं बना है
  • बच्चे स्कूल जाने के लिए नदी पार करते हैं, बरसात में जलस्तर बढ़ने से रास्ता और भी असुरक्षित हो जाता है
  • स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षकों ने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क और पुल निर्माण की मांग की है
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पटना:

बिहार के रोहतास जिले के हरिवंशपुर पंचायत में बच्चों के लिए स्कूल तो बन गया लेकिन वे वहां तक पहुंचें कैसे. स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है. हरिवंशपुर टोला की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी. मकसद था ग्रामीण बच्चों को उनके घर के पास ही प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना. लेकिन जमीनी हालात बिल्कुल उलट हैं. लगभग 19 साल बीत जाने के बावजूद आज तक इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क बन सकी है और न ही नदी पर पुल का निर्माण हो पाया है.

लेकिन फिर भी यहां के नन्हे बच्चों में पढ़ाई की ललक तो देखिए कि हर दिन ये लोग अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसे रास्ते से स्कूल जाते हैं, जहां कुछ भी हो सकता है. इन बच्चों के लिए स्कूल की राह बिल्कुल भी आसान नहीं है. रास्ता बहुत दुर्गम है. गांव से स्कूल जाने के लिए बच्चों को एक नदी पार करनी पड़ती है, जिस पर न तो पुल है और न ही कोई सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग.

नदी पार करने के लिए पुल ही नहीं

 सामान्य दिनों में किसी तरह बच्चे नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं. नदी का जलस्तर बढ़ने से रास्ता पूरी तरह असुरक्षित हो जाता है. स्थानीय ग्रामीणों के मुाबिक, कई बार बच्चों को नदी पार करने के दौरान बिजली के पोल का सहारा लेना पड़ता है. यह दृश्य न सर्फ दिल दहला देने वाला है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर करता है.

ग्रामीणों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चे जब स्कूल जाने के लिए नदी में उतरते हैं, तो अभिभावकों की सांसें अटक जाती हैं. किसी अनहोनी की आशंका हमेशा बनी रहती है. बावजूद इसके, शिक्षा के प्रति बच्चों की लगन और अभिभावकों की मजबूरी उन्हें यह जोखिम उठाने के लिए मजबूर करती है. यह स्थिति सीधे तौर पर बच्चों के जीवन और भविष्य दोनों के लिए खतरा है.

जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे बच्चे

अगर स्कूल की भौतिक संरचना की बात करें तो यह लगभग 50 डिसमिल भूमि में स्थापित है. स्कूल में कार्यालय सहित कुल चार कमरे हैं. वहीं 60 बच्चे यहां पढ़ते हैं, जिनके लिए यह व्यवस्था बस चल ही रही है. हालांकि, संसाधनों की सीमितता के बावजूद शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने की पूरी कोशिश करते हैं. फिर भी सबसे बड़ी समस्या स्कूल तक सुरक्षित पहुंच की कमी है. 

स्कूल में प्रिंसिपल समेत कुल चार शक्षक हैं. हाल के महीनों मे एक शिक्षक राघवेंद्र कुमार सिंह का किडनी खराब होने की वजह से निधन हो गया तो एक सीट खाली है. जिसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है. कम शिक्षकों में अधिक बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी बाकी शिक्षकों पर आ गई है. स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस गंभीर समस्या को लेकर संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों के सामने उठाया. आवेदन, ज्ञापन और मौखिक शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है, इससे ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा दोनों हैं.

शिक्षक कर रहे पक्की सड़क और पुल बनाने की मांग

स्कूल के शिक्षकों ने स्थानीय विधायक आलोक कुमार सिंह से मुलाकात कर पक्की सड़क और नदी पर पुल निर्माण की मांग रखी है. विधायक ने समस्या को गंभीरता से सुनते हुए जल्द ही सड़क और पुल निर्माण के लिए पहल करने का आश्वासन दिया है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार आश्वासन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धरातल पर भी नजर आएगा.

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कुल मिलाकर, हरिवंशपुर टोला का यह प्राथमिक विद्यालय ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाता है. डर बस यही है कि अगर समय रहते सड़क और पुल का निर्माण नहीं हुआ, तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता.


 

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