2 लाख रुपये, फ्री बिजली के लिए 32 विभागों के बजट में कटौती! बाढ़ राहत पर होगा असर, निर्माण पर भी लगेगा ब्रेक!

इस बजट में स्वास्थ्य विभाग की हिस्सेदारी घटी है. पिछले बार स्वास्थ्य विभाग का बजट 20 हजार 35 करोड़ था, इस बार इसकी राशि मामूली रूप से बढ़ी है. अब यह 21 हजार 270 करोड़ हुई है. हालांकि हिस्सेदारी 6.32 % से घटकर 6.12% हो गई है.

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पटना:

बिहार बजट में इस बार चुनावी वादों का असर दिख रहा है. महिलाओं को दो लाख रुपये देने, 125 यूनिट फ्री बिजली और रोजगार सृजन के लिए विभागों का बजट बढ़ा है. ग्रामीण विकास विभाग, ऊर्जा, शहरी विकास और उद्योग विभाग के बजट में वृद्धि हुई है. इन विभागों के बजट में बढ़ोतरी के कारण कई विभागों के बजट में कटौती हुई है. स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, समाज कल्याण विभाग समेत 32 विभागों के बजट में कटौती की गई है. इन सभी विभागों की हिस्सेदारी कम हुई है. 

रोड, भवन निर्माण की गति होगी धीमी!

मौजूदा बजट में भवन निर्माण विभाग का बजट 6153 करोड़ है जबकि पिछले बजट में यह 6894 करोड़ था. विभाग की हिस्सेदारी 2.18% थी जो अब घटकर 1.77% हो गई है. वहीं पथ निर्माण विभाग का बजट पिछली बार के मुकाबले बढ़ा है लेकिन बजट में हिस्सेदारी कम हुई है. पिछले बजट में विभाग की हिस्सेदारी 2.15% थी, वह अब घटकर 2.13% हो गई है. 

स्वास्थ्य विभाग की हिस्सेदारी घटी 

इस बजट में स्वास्थ्य विभाग की हिस्सेदारी घटी है. पिछले बार स्वास्थ्य विभाग का बजट 20 हजार 35 करोड़ था, इस बार इसकी राशि मामूली रूप से बढ़ी है. अब यह 21 हजार 270 करोड़ हुई है. हालांकि हिस्सेदारी 6.32 % से घटकर 6.12% हो गई है. 

बाढ़ नियंत्रण पर खर्च घटा, बढ़ेगी चुनौती

बिहार हर साल बाढ़ का दंश झेलता है. जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग इसकी तैयारी करते हैं. इस बार दोनों विभागों का बजट घटा है. जल संसाधन विभाग का बजट पिछली बार 7451 करोड़ था, जो घटकर 7127 करोड़ हो गया है. वहीं आपदा प्रबंधन विभाग का बजट घटकर 4967 करोड़ से 4799 करोड़ हो गया है. 

पेंशन की राशि बढ़ी, समाज कल्याण विभाग की हिस्सेदारी घटी 

बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले लाभार्थियों की संख्या बढ़ी है. वहीं पेंशन की राशि भी 400 से बढ़ाकर 1100 कर दी गई है. लेकिन जिस विभाग के पास यह पेंशन देने की जिम्मेदारी है, उस विभाग की हिस्सेदारी बजट में कम हुई है. समाज कल्याण विभाग का बजट पिछले साल 8774 करोड़ था, इस बार यह बजट 8470 करोड़ हो गया है. इसके अलावा अनुसूचित जाति - जनजाति कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, पिछड़ा - अत्यंत पिछड़ा कल्याण विभाग के बजट में भी कमी आई है. सरकार ने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए दूसरे विभागों के फंड में कटौती की है. अब यह देखना होगा कि इससे इन विभागों की योजनाओं का संचालन पर क्या असर पड़ता है.

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