Bihar News: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर अब सख्ती शुरू हो गई है. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई अहम निर्देश जारी किए हैं. बेतिया के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह के इस फैसले से करीब डेढ़ लाख छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है.
फीस और जबरन खरीद पर लगेगी लगाम
जिले में 552 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल और 39 सीबीएसई से जुड़े विद्यालय संचालित हैं. इन स्कूलों पर लंबे समय से अधिक फीस वसूली और अभिभावकों को तय दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने के आरोप लगते रहे हैं. जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त आदेश जारी किए हैं.
अब कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा. अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे.
फीस और जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी
जिलाधिकारी के आदेश के मुताबिक सभी स्कूलों को अपनी फीस संरचना, किताबों की सूची और यूनिफॉर्म की जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करनी होगी. जहां संभव हो वहां इसे वेबसाइट पर भी डालना होगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
बार-बार यूनिफॉर्म बदलने पर रोक
स्कूलों द्वारा हर साल यूनिफॉर्म बदलने की शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने साफ किया है कि एक बार तय यूनिफॉर्म कम से कम तीन साल तक नहीं बदली जाएगी. इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ नहीं पड़ेगा. साथ ही बच्चों को बड़े भाई-बहनों की पुरानी किताबें इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा.
RTE छात्रों के साथ भेदभाव नहीं
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत पढ़ रहे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव सख्त मना है. उन्हें सभी सुविधाएं समान रूप से देनी होंगी. प्रशासन ने स्कूल वाहनों के लिए भी नए नियम लागू किए हैं. सभी बसों में सीसीटीवी कैमरा, फर्स्ट एड किट और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य किए गए हैं.
उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
डीएम तरनजोत सिंह ने साफ कहा है कि स्कूलों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. फीस बढ़ोतरी या नियमों का उल्लंघन करने पर प्राचार्य और संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी. निगरानी की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई है.
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