बिहार में डरा रहे जर्जर पुल, 3 साल में ही धंस गया करोड़ों की लागत से बने पुल का स्लैब

बिहार के अररिया में परमान नदी पर करोड़ों की लागत से 4 साल पहले बने पुल का स्लैब धंसने और दरारें आने के बाद हड़कंप मच गया है. पटना से आए ब्रिज एक्सपर्ट्स और इंजीनियरों की टीम वैज्ञानिक तकनीक से जांच कर रही है. गड़बड़ी साबित होने पर निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई होगी.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
बिहार के अररिया में 3 साल में ही धंस गया करोड़ों की लागत से बने पुल का स्लैब

बिहार में एक के बाद एक जर्जर पुलों की असलियत सामने आ रही है. कई जर्जर पुल ऐसे भी हैं, जिनको बने हुए अभी चंद साल ही हुए हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए ये पुलिस कुछ ही साल में जर्जर स्थिति में आ गए. जिससे पुल निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल होने लगे हैं. पहले विक्रमशिला सेतु ढह गया. इसके बाद पटना आईआईटी की रिपोर्ट में कई पुलों के जर्जर होने की बात सामने आई है. अब अररिया जिले के झमटा गांव में परमान नदी पर 7 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत से बने पुल में गंभीर तकनीकी खामियों के मामले ने तूल पकड़ लिया है. पुल का स्लैब धंस जाने और रेलिंग में दरारें आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं.

पुल की जर्जर स्थिति से नाराजगी

दरअसल, शनिवार को पटना और पूर्णिया से विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम झमटा गांव पहुंची और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक से पुल की जांच शुरू की. जांच दल में ब्रिज एक्सपर्ट अरुण मिश्रा, चीफ इंजीनियर दीप नारायण प्रसाद और पूर्णिया के अधीक्षण अभियंता रविन्द्र कुमार सिंह सहित कई तकनीकी अधिकारी शामिल हैं. बताया जाता है कि ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा करीब चार वर्ष पूर्व इस पुल का निर्माण कराया गया था. निर्माण का जिम्मा प्रकाश कंस्ट्रक्शन को दिया गया था, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद महज चार साल के भीतर पुल की स्थिति खराब होने से ग्रामीणों में नाराजगी है.

जांच कमेटी की रिपोर्ट से खुलेगा राज

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी जल्दी पुल में दरारें और धंसाव जैसी समस्याएं नहीं आतीं. मामले को लेकर लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कहीं निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया. करोड़ों रुपये की परियोजना में संभावित भ्रष्टाचार और लापरवाही की आशंकाओं को लेकर अब निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है. हालांकि चीफ इंजीनियर ने इस संबंध में कोई बयान नहीं दिया, लेकिन अधीक्षण अभियंता रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच के लिए टीम गठित की गई है.

जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्तरीय जांच भी कराई जा सकती है. फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है. रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुल की बदहाल स्थिति तकनीकी खामी का परिणाम है या फिर निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता और भ्रष्टाचार हुआ है. यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है. 

Advertisement

यह भी पढे़ं-

बिहार में पुल की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल! गोपालगंज-बेतिया महासेतु में 7 इंच का गैप, डीएम ने भेजी रिपोर्ट

भागलपुर विक्रमशिला सेतु हादसाः पहले ही पता चल गया था गिरनेवाला है पुल, DM ने बताया कैसे बची लोगों की जान

Advertisement
Featured Video Of The Day
UP Power Crisis: यूपी में बिजली संकट को लेकर Akhilesh Yadav ने योगी सरकार को घेरा! | Breaking News