ब्राजील सरकार ने BYD पर लगाया 'गुलामी' का आरोप, 163 मजदूरों को छुड़ाया, कंपनी 'डर्टी लिस्ट' में शामिल

BYD दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों में से एक है. इस फैसले से कंपनी की छवि पर बड़ा असर पड़ सकता है.

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ब्राज़ील की लेबर मिनिस्ट्री यानी श्रम मंत्रालय ने चीनी ऑटोमोबाइल कंपनी BYD को उन कंपनियों की सूची में शामिल कर लिया है, जिन पर मजदूरों के साथ गुलामी जैसी स्थिति में काम करवाने का आरोप है. 6 अप्रैल को सामने आए एक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट के मुताबिक, यह कदम एक गंभीर जांच के बाद उठाया गया है. यह खबर इसलिए भी बड़ी है क्योंकि BYD दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों में से एक है. इस फैसले से कंपनी की छवि पर बड़ा असर पड़ सकता है.

जांच में क्या सामने आया?

डॉक्यूमेंट्स में बताया गया है कि दिसंबर 2024 में ब्राज़ील के अधिकारियों ने करीब 163 चीनी मजदूरों को ऐसी परिस्थितियों में काम करते हुए पाया, जिन्हें उन्होंने 'गुलामी जैसी स्थिति' बताया. ये मजदूर ब्राज़ील के उत्तर-पूर्वी राज्य बाहिया में एक ऑटो फैक्ट्री बनाने का काम कर रहे थे. अधिकारियों का कहना था कि इन मजदूरों को बेहद खराब परिस्थितियों में रखा गया था, जो मानवाधिकारों के खिलाफ है. इस मामले के सामने आने के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया.

BYD का जवाब

BYD पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुकी है और कहा है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है. इसके बावजूद, ब्राज़ील सरकार ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं और अपील खत्म होने के बाद ही कंपनी को इस सूची में डाला है. इसका मतलब है कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से जांचा और उसके बाद ही यह निर्णय लिया गया.

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'डर्टी लिस्ट' का असर

ब्राज़ील में इस सूची को 'डर्टी लिस्ट' कहा जाता है, जिसमें शामिल होना किसी भी कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका होता है. इस सूची में आने के बाद कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है और उसे ब्राज़ील के बैंकों से कुछ प्रकार के लोन लेने की अनुमति नहीं मिलती. हालांकि, कंपनी अपने कामकाज को जारी रख सकती है. इस सूची में शामिल कंपनी को आमतौर पर दो साल तक इसमें रहना पड़ता है, जब तक कि अदालत कोई अलग फैसला न दे.

कंपनियां इस सूची में शामिल होने से बच सकती हैं अगर वे सरकार के साथ एक समझौता कर लें, जिसमें वे अपनी गलतियों को सुधारने और प्रभावित मजदूरों को मुआवजा देने का वादा करती हैं. BYD ने इस मामले में लेबर प्रॉसिक्यूटर के साथ एक समझौता किया है, लेकिन सरकार के साथ नहीं. इस बीच, कंपनी का यह प्लांट अक्टूबर में शुरू भी हो चुका है, जिससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है.

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