
Makar Sankranti Til Importance: मकर संक्रांति पर दान देने, पतंग उड़ाने और तिल-गुड़ खाने की परंपरा है. यह पर्व शरीर, मन और आत्मा तीनों को साफ करने का माना जाता है. खास बात यह है कि इस दिन तिल को सबसे ज्यादा पवित्र और जरूरी माना गया है. स्नान से लेकर दान और पूजा तक हर जगह तिल बेहद जरूरी होता है. जो लोग मकर संक्रांति के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पाते, शास्त्रों के अनुसार, वे घर पर ही तिल मिलाकर पानी से स्नान कर सकते हैं. इसका तीर्थ स्नान जैसा पुण्य मिलता है यानी तिल आस्था और भावना की सबसे जरूरी चीज है. तो ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर तिल इतना खास क्यों है, मकर संक्रांति पर इसका महत्व क्यों बढ़ जाता है. आइए जानते हैं..
यह भी पढ़ें: Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर इन 3 राशियों से प्रसन्न रहेंगे शनिदेव, मिलेगी गुड न्यूज, रुके काम होंगे पूरे
तिल का महत्व
ठंड के मौसम में तिल शरीर के लिए किसी औषधि से कम नहीं है. यह शरीर को गर्म रखता है, ताकत देता है और जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है. यही वजह है कि मकर संक्रांति के आसपास तिलकुट, लड्डू और चटनी खाने की परंपरा बनी और सदियों से यह चली आ रही है.
आयुर्वेद और धर्म में तिल का खास महत्व
शास्त्रों में तिल के छह खास इस्तेमाल बताए गए हैं, जिन्हें षट्तिला कहा जाता है. इसके अनुसार, तिल मिले जल से नहाना, तिल के तेल से शरीर पर मालिश क रना, हवन में तिल की आहुति देना, तिल मिला पानी पीना, खाने में तिल का इस्तेमाल और जरूरतमंद को तिल का दान खास होता है. मान्यता है कि इन छह कामों को करने से पर्व का पूरा फल मिलता है और निगेटिविटी दूर होती है. इस साल मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही है, जिससे तिल का महत्व और बढ़ जाता है.
ज्योतिष में तिल-गुड़ की अहमियत
ज्योतिष के अनुसार, तिल शनि और गुड़ सूर्य का का प्रतीक है. मकर संक्रांति पर इन दोनों का साथ में दान करने से शनि और सूर्य के अच्छे प्रभाव बढ़ते हैं. इसी वजह से इस दिन तिल-गुड़ का दान बहुत शुभ माना जाता है. उत्तर भारत में मकर संक्रांति पर कुल देवता को तिल, गुड़ और चावल चढ़ाए जाते हैं. फिर वही प्रसाद पूरे परिवार में बांटा जाता है. यह परंपरा घर में आपसी समझ, प्रेम और एकता का प्रतीक मानी जाती है.
तिल कहां से आया और इसका महत्व क्यों बढ़ता गया?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद पर अत्याचार किए, तो भगवान विष्णु क्रोध में आ गए. उनके शरीर से निकला पसीना जब धरती पर गिरा, तभी तिल की उत्पत्ति हुई. इसी कारण तिल को गंगाजल जितना पवित्र माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जैसे गंगाजल आत्मा को मोक्ष का रास्ता दिखाता है, वैसे ही तिल पूर्वजों और भटकी आत्माओं को शांति देता है. इसलिए पितृ कार्यों में तिल का इस्तेमाल जरूरी माना गया है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.