गुरू का कुंडली के नौवें भाव में कैसा होता है प्रभाव, यहां जानिए कुछ खास बातें

इस भाव में गुरू के नकारात्मक प्रभाव की बात करें तो व्यक्ति कई बार आगे बढ़ते समय अपने पुराने रिश्तों को पीछे ही छोड़ देता है. ऐसी स्थिति घर से बाहर रहने के दौरान ज्यादा देखने को मिलती है.

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इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति धार्मिक और आध्यात्मिक होता है.

Astrology: कुंडली के हर भाव में गुरू शुभ माने जाते हैं. हालांकि, कई बार उसके विपरीत प्रभाव भी देखने को मिलते हैं. इस भाव में गुरू के प्रभाव से व्यक्ति धार्मिक और आध्यात्मिक होता हैं. नौवें भाव में गुरू जातक को प्रसिद्धि दिलाता है. बृहस्पति के प्रभाव से ऐसे लोगों में दान-पुण्य आदि के प्रति भी विश्वास होता है. नौवें भाव को भाग्य का भाव भी कहा जाता है. ऐसे में नौवें भाव में शुभ ग्रहों प्रभाव से व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है और वह जीवन में काफी आगे बढ़ता है. इसे धर्म का स्थान भी कहा जाता है.

गुरू के सकारात्मक प्रभाव

गुरू के नौवें भाव में सकारात्मक प्रभाव की बात करें, तो व्यक्ति उच्च विचार वाले, शांत और सदाचारी होते हैं. ये सभी शास्त्रों के ज्ञाता होने के साथ ही आध्यात्मिक भी होते हैं. इन्हें अपना ज्ञान दूसरों के साथ साझा करना भी पसंद होता है. तीर्थ यात्रा और धार्मिक कार्यों में भी इनकी रुचि होती है. ऐसे लोग अपने कुल की परंपरा को मानने वाले होते हैं. इनके बच्चे भी अच्छे होते हैं. साथ ही ये अपनी जुबान के भी पक्के होते हैं.

गुरू के नकारात्मक प्रभाव

इस भाव में गुरू के नकारात्मक प्रभाव की बात करें, तो व्यक्ति कई बार आगे बढ़ते समय अपने पुराने रिश्तों को पीछे ही छोड़ देता है. ऐसी स्थिति घर से बाहर रहने के दौरान ज्यादा देखने को मिलती है. यात्रा में ये अपने परिवार के लोगों को साथ नहीं रखते, जबकि इस मामले में ध्यान देने की जरूरत है.

वैवाहिक जीवन पर प्रभाव

नौवें भाव में गुरू का प्रभाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन पर भी देखने को मिलता है. अगर गुरू का प्रभाव विपरीत हो, तो इसका असर वैवाहिक जीवन पर देखने को जरूर मिलता है. किसी महिला की कुंडली के नौवें भाव में अगर बृहस्पति कमजोर हों तो उसके विवाह में परेशानी होती है. अगर विवाह हो जाता है तो वह लंबे समय तक नहीं चल पाता. ग्रह के विपरीत प्रभाव के कारण विवाह में विलंब के साथ ही वैवाहिक जीवन में परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है.

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करियर पर प्रभाव

गुरू के करियर पर प्रभाव की बात करें तो ऐसा व्यक्ति लेखक हो सकता है. राजनीति में भी ऐसे लोग देखने को मिलते हैं. ऐसे लोग मंत्री या नेता हो सकते हैं. कानूनी काम, धार्मिक विषयों और क्लर्क के काम से भी अपना जीविकोपार्जन करते हैं. गुरू के प्रभाव से शिक्षा, अध्यापन, खेल आदि क्षेत्र में भी इन्हें सफलता मिलती है. इन्हें भाग्य का साथ मिलता है और जीवन के 24वें साल में इनका भाग्योदय होता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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