Hanuman Chalisa Path Niyam: मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें? जान लें सही नियम

Hanuman Chalisa Path Niyam: आइए जानते हैं मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें और इस दौरान किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है.

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हनुमान चालिसा पाठ के नियम

Hanuman Chalisa Path Niyam: मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, रोग, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव दूर होता है. लेकिन इसके लिए सही नियमों के साथ पाठ करना जरूरी है. आइए जानते हैं मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें और इस दौरान किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है.

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हनुमान चालीसा पाठ के नियम

सही समय पर पाठ करें

मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4–6 बजे) या फिर संध्या समय हनुमान चालीसा का पाठ करना सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय वातावरण शुद्ध और मन शांत होता है.

सही जगह पर पाठ करें

पाठ हमेशा पूजा स्थान या हनुमान मंदिर में करें. अगर मंदिर न जा सकें तो घर के साफ स्थान पर हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठकर पाठ करें.

स्नान और शुद्धता का ध्यान रखें

पाठ से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. लाल या नारंगी रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं.

आसन पर बैठकर पाठ करें

हनुमान चालीसा का पाठ आसन पर बैठकर करें और पाठ पूरा होने से पहले उठें नहीं. इससे पाठ का पूरा फल मिलता है.

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मन में द्वेष न रखें

पाठ के समय अपना ध्यान न भटकाएं.  मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें.

भोग लगाएं 

पाठ के बाद हनुमान जी को गुड़-चना या बूंदी का भोग लगाएं. 'जय श्री राम' का जाप जरूर करें.

यहां से पढ़ें श्री हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi

श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि।
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे।
कांधे मूंज जनेउ साजे।।
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर।
काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानु।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
ब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूतपिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।।
असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

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दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप.
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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