कुंडली के तीसरे भाव में अशुभ ग्रहों का प्रभाव कैसा होता है, जानिए यहां

Ashubh Grah: अगर कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु हों तो इसका विपरीत असर आपके जीवन पर देखने को मिलता है.

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ग्रहों की स्थिति राशियों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करती है.
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Astrology: कुंडली का हर भाव महत्वपूर्ण होता है. इन भावों में ग्रहों की मौजूदगी आपके जीवन को प्रभावित करती है. कुंडली के तीसरे भाव में अगर अशुभ ग्रह हों तो आपको थोड़ा संभल कर रहने के साथ ही इसका उपाय करने की भी जरूरत होती है. अगर कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु हों तो इसका विपरीत असर आपके जीवन पर देखने को मिलता है. आइए जानते हैं तीसरे भाव में इन अशुभ ग्रहों का क्या प्रभाव आपके जीवन पर देखने को मिल सकता है.

कुंडली के तीसरे भाव में अशुभ ग्रह

कुंडली के तीसरे भाव पर बुध ग्रह का प्रभाव माना गया है. इस भाव की राशि मिथुन होती है. तीसरा भाव पराक्रम का माना जाता है. वैसे चंद्रमा, मंगल, शुक्र और शनि के लिए यह भाव अच्छा माना जाता है, लेकिन पीड़ित होने की स्थिति में इनके विपरीत प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं.

मंगल देता है भाई-बहनों के साथ समस्या

मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है. आप मानसिक तौर पर काफी एक्टिव होंगे, लेकिन आपको अपनी इस एनर्जी का सही दिशा में प्रवाह करने की जरूरत होगी. कई बार आप लापरवाही से काम करते नजर आएंगे. किसी भी तरह के निर्णय लेने में भी आप लापरवाही कर सकते हैं. अपने करीबियों को खासकर भाई-बहनों के साथ भी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. खासकर छोटे भाई के सुख में कमी आ सकती है. ऐसे लोगों को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना होगा, क्योंकि मंगल के प्रभाव (Mangal Effects) से उग्रता देखने को मिल सकती है.

सूर्य बनाता है पराक्रमी

तीसरे भाव में सूर्य के प्रभाव से आप में आत्मविश्वास और किसी काम के प्रति रुचि देखने को मिलेगी. तीसरे भाव में सूर्य के प्रभाव से आपको भाई का सुख कम ही मिलेगा. सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति पराक्रमी हो सकता है. ये काफी बलशाली होंगे और समाज में भी प्रतिष्ठा होगी. पढ़ाई के क्षेत्र में देखें, तो साइंस और गणित जैसे विषयों में इनकी रुचि हो सकती है. ऐसे लोग प्रोफेसर या शिक्षक भी बन सकते हैं. वैसे तो इस भाव में सूर्य का प्रभाव अच्छा होता है, लेकिन अगर वह पीड़ित हो, तो विपरीत प्रभाव देखने को मिल सकता है.

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गंभीर स्वभाव देता है शनि

शनि के प्रभाव से आप गंभीर तो होंगे, लेकिन कम्युनिकेशन के मामले में आपको परेशानी हो सकती है. किसी भी तरह के बदलाव को लेकर परेशानी हो सकती है, साथ ही स्थितियां भी आपके अनुकूल नहीं नजर आएंगी. इस भाव में शनि के प्रभाव से आप निरोगी हो सकते हैं. ऐसे लोग कम बोलने वाले भी होते हैं. इनमें चतुराई, विवेक जैसे गुण देखने को मिलेंगे. इनकी आर्थिक स्थिति भी बेहतर होगी. कई बार खराब शनि के प्रभाव से व्यक्ति आलसी होता है और उसका मन अशांत हो सकता है. इस भाव में शनि के मजबूत और कमजोर होने का भी अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है.

राहु बनाता है निरोगी 

तीसरे भाव में राहु के प्रभाव से आपको भाग्य का साथ मिल सकता है और आपकी आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो सकती है. तीसरे भाव में राहु को दु:ख का नाश करने वाला माना गया है. ऐसे में व्यक्ति निरोगी होता है. ऐसे लोगों में साहस और पराक्रम भी देखने को मिलता है. इनकी बुद्धि तीव्र होती है, लेकिन स्वभाव में चंचलता भी देखने को मिल सकती है. इस भाव में राहु के प्रभाव से भाग्योदय होता है और आपको कम प्रयास से ही लाभ की प्राप्ति हो सकती है. हालांकि राहु के नकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति अभिमानी हो सकता है. उसमें आलस्य और शंकालु प्रवृत्ति भी देखने को मिलती है.

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कई बार केतु देता है अनजाना भय

तीसरे भाव में केतु (Ketu) के कारण से आप किसी भी काम को करने में सक्षम तो होंगे, लेकिन इन कार्यों को लेकर आपको खुद पर ही संदेह होगा. ऐसे में आपको किसी व्यक्ति के सहयोग की जरूरत होगी. हालांकि केतु के प्रभाव से भाई बहनों के साथ आपके संबंध भी खराब हो सकते हैं. तीसरे भाव में केतु के प्रभाव से व्यक्ति धैर्यवान बनता है. शत्रुओं पर भी विजय मिलती है. हालांकि इस भाव में केतु के प्रभाव से व्यक्ति चिंताग्रस्त भी हो सकता है. अकारण की चिंता और भ्रम भी देखने को मिल सकता है. इनमें अनजाना भय भी देखने को मिल सकता है. अगर आप ध्यान नहीं देंगे तो बेकार के विवाद में भी फंस सकते हैं.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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