Rapido को अब तक आप लोग सवारी, पार्सल या ग्रॉसरी डिलीवरी के लिए ही जानते हैं. लेकिन, सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट से कुछ ऐसा पता चला, जिसने लोगों को हैरान कर दिया. एक्स पर सामने आई इस घटना में एक महिला ने Rapido Porter बुक किया, ऑनलाइन पेमेंट किया और एक बॉक्स डिलीवर करवाया. सब कुछ सामान्य लग रहा था, जब तक डिलीवरी लोकेशन पर पहुंचकर सच्चाई सामने नहीं आई.
डिलीवरी लेकिन रिसीवर कोई नहीं
पोस्ट के मुताबिक, जब Rapido Porter महिला के घर पहुंचा तो उसने गेट के अंदर से एक कार्डबोर्ड बॉक्स सौंपा. जाने से पहले उसने शालीनता से पूछा, मैडम, पेमेंट ऑनलाइन है या कैश? महिला ने जवाब दिया, भैया, ऑनलाइन हो चुका है. लेकिन जब पोर्टर तय लोकेशन पर पहुंचा, तो वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, सिर्फ कचरे का ढेर पड़ा था. हैरान होकर उसने महिला को कॉल किया और पूछा, मैडम, किसको देना है पार्सल?
महिला का जवाब चौंकाने वाला था- भैया, वहीं फेंक दो, ये सब कचरा है. अब लोगों का कचरा भी हम डिलीवर करेंगे? महिला की बात सुनते ही पोर्टर हंस पड़ा और बोला, तो अब यहां तक बात पहुंच गई है, अब हम दूसरों का कचरा भी डिलीवर करेंगे! पोस्ट के अंत में लिखा गया- महिला ने पोर्टर सर्विस का गलत इस्तेमाल किया.
‘देसी जुगाड़' या असंवेदनशीलता?
घटना वायरल होते ही इंटरनेट दो हिस्सों में बंट गया. कुछ लोगों ने इसे देसी जुगाड़ बताया. एक यूज़र ने लिखा, यह शुद्ध भारतीय जुगाड़ है! अब लोग पोर्टर से कचरा भी भिजवा रहे हैं. पैसे दिए, काम हुआ- गलत क्या है? वहीं कई लोगों ने इसे डिलीवरी वर्कर के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया. एक कमेंट में लिखा गया, ऊपर से मज़ेदार लगता है, लेकिन अंदर से असहज कर देता है. किसी मेहनतकश को कचरा ढोने के लिए इस्तेमाल करना ठीक नहीं. एक यूज़र ने कहा, सुविधा का मतलब यह नहीं कि हम इंसानियत भूल जाएं. कंवीनियंस के साथ कॉन्शियंस भी होना चाहिए.
सुविधा बनाम ज़िम्मेदारी की बहस
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या हर उपलब्ध सेवा का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे किया जाना चाहिए? या फिर सुविधा और नवाचार की एक नैतिक सीमा भी होनी चाहिए? कई यूज़र्स का मानना है कि यह सिर्फ जुगाड़ नहीं, बल्कि सिविक सेंस और गिग वर्कर्स के सम्मान का मामला है. Rapido Porter से कचरा भिजवाने की यह घटना भले ही पहली नज़र में मज़ेदार लगे, लेकिन यह समाज को आईना भी दिखाती है. यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि सुविधा और इंसानियत के बीच संतुलन बनाए रखना कितना ज़रूरी है.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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