ट्रेन के चेयरकार कोच में आर्मरेस्ट पर पैर रखकर लेटी महिला की फोटो वायरल, यूजर्स बोले- आखिर कब सीखेंगे लोग?

तस्वीर का केंद्र बिंदु एक महिला है - उसका चेहरा छिपा हुआ है - जो सीट पर लेटी हुई है और उसके पैर उसके सामने आर्मरेस्ट पर टिके हुए हैं, जो किसी दूसरे यात्री को परेशानी हो सकती है.

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ट्रेन के चेयरकार कोच में आर्मरेस्ट पर पैर रखकर लेटी महिला की फोटो वायरल

सार्वजनिक जगहों पर समझदारी से रहने और जिम्मेदारी के साथ सभ्य व्यवहार करना सिविक सेंस का एक हिस्सा होता है. लेकिन कुछ लोग ऐसी जगहों पर ऐसा व्यवहार करते हैं, जिससे दूसरों को परेशानी होती है. इंटरनेट पर वायरल हो रही एक तस्वीर इसी बात को दर्शाती है. जिसे शेयर करते हुए यूजर ने बेसिक सिविक सेंस की बात की है.

एक्स पर एक पोस्ट ने भारत में नागरिक भावना और सार्वजनिक शिष्टाचार पर बहस छेड़ दी है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों में व्यक्तिगत आचरण के बारे में चिंताओं को उजागर किया गया है. यूजर @Ravi3pathi द्वारा शेयर किए गए ट्वीट में ट्रेन के अंदर की एक तस्वीर है, जिसमें नीली सीटें दिखाई दे रही हैं.

तस्वीर का केंद्र बिंदु एक महिला है - उसका चेहरा छिपा हुआ है - जो सीट पर लेटी हुई है और उसके पैर उसके सामने आर्मरेस्ट पर टिके हुए हैं, जो किसी दूसरे यात्री को परेशानी हो सकती है. साथ में कैप्शन में लिखा है, "भारत में बुनियादी नागरिक भावना की कमी न तो क्षेत्रीय मुद्दा है और न ही वर्ग का मुद्दा है."

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यह पोस्ट जल्द ही वायरल हो गई, जिसे 8,94,000 से ज़्यादा बार देखा गया और इस पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आईं. जहां कुछ यूज़र्स ने इस व्यवहार की आलोचना की, वहीं अन्य ने इसके विपरीत दृष्टिकोण साझा किए, जिससे भारत में नागरिक शिष्टाचार पर गरमागरम बहस छिड़ गई.

एक यूजर ने लिखा, "आपको यह समझना चाहिए कि आम तौर पर लोगों में नागरिक भावना की कमी होती है, चाहे वे किसी भी देश के हों. लोग असभ्य, असभ्य, आक्रामक, गंदे होते हैं और पूरी दुनिया में ऐसा करते हैं. लोग यहां-वहां कूड़ा फेंकते हैं, उसे लात मारते हैं, तोड़ते हैं, मैंने देखा है कि "अन्य" लोग खाने की ट्रे पर अपने बच्चों के मल के डायपर बदलते हैं, वे हवाई जहाज के सामान चुराते हैं और क्या-क्या नहीं. मुझे मत बताइए कि आपने "अन्य" लोगों का विमानों में दुर्व्यवहार करते हुए एक भी वीडियो नहीं देखा है." एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, "यही कारण है कि भारतीयों को हर दूसरे देश में नीची नज़र से देखा जाता है, भारतीयों का सार्वजनिक स्थानों पर बहुत खराब व्यवहार और स्वच्छता है."

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तीसरे यूजर ने लिखा, "अगर आप टिकट खरीद भी लें तो भी आपको सीट का "मालिक" नहीं माना जाता. आप जो कह रहे हैं, वह सिर्फ़ खराब परवरिश और नागरिक भावना और सामाजिक शिष्टाचार की समझ की कमी को दर्शाता है. सार्वजनिक स्थानों को अपना निजी लाउंज मानना ​​सिर्फ़ बुरा व्यवहार है." चौथे यूजर ने लिखा, "यह हर जगह है, सिर्फ़ भारत में नहीं. भारतीय दुनिया की सबसे बड़ी नस्ल, जातीयता और राष्ट्रीयता हैं." पांचवें यूजर ने कमेंट किया, "भारत में बुरा व्यवहार जीवन जीने का एक तरीका है."

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