What Happens After Death: मौत के बाद क्या होता है? ये सवाल बरसों से इंसान को बेचैन करता आया है. अब न्यूयॉर्क के NYU Langone Medical Center में हुई रिसर्च ने इस राज से थोड़ा पर्दा उठाया है. डॉक्टर सैम परनिया की टीम ने पाया कि क्लिनिकली डेड घोषित होने के बाद भी दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रह सकता है.
मौत के बाद दिमाग की हलचल (Brain Activity After Death)
2023 में जर्नल Resuscitation में छपी स्टडी में 567 कार्डियक अरेस्ट मरीजों को शामिल किया गया. इनमें से करीब 10 फीसदी मरीज जिंदा बच पाए. हैरानी की बात ये रही कि बचने वाले 40 फीसदी लोगों में CPR के दौरान EEG में गामा, डेल्टा और अल्फा वेव्स जैसी ब्रेन एक्टिविटी दिखी. ये वेव्स सोच, याददाश्त और होश से जुड़ी होती हैं. डॉक्टर परनिया के मुताबिक, पहले माना जाता था कि दिल रुकने के 10 मिनट बाद दिमाग को स्थायी नुकसान हो जाता है, लेकिन अब तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है.
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लूसिड डाइंग का तजुर्बा (Lucid Dying Experience)
कई सर्वाइवर्स ने बताया कि उन्होंने खुद को शरीर से अलग महसूस किया. किसी ने डॉक्टरों की बातें सुनने की बात कही, तो किसी ने जिंदगी का पूरा हिसाब किताब आंखों के सामने घूमते देखा. इसे डॉक्टरों ने लूसिड डाइंग कहा है. AWARE II स्टडी में दावा किया गया कि, मौत के करीब पहुंचने पर दिमाग में डिसइनहिबिशन होता है, यानी दिमाग के ब्रेक हट जाते हैं और यादें तेजी से उभरती हैं.
क्यों अहम है ये खुलासा (Why This Research Matters)
ये रिसर्च मेडिकल साइंस, नैतिकता और फिक्री बहस को नई दिशा देती है. क्या मौत एक पल है या एक प्रोसेस? क्या सही इलाज से मौत को पलटा जा सकता है? फिलहाल इतना तय है कि मौत का सफर उतना सादा नहीं जितना हम समझते थे. दिल थमने के बाद भी दिमाग कुछ देर तक अपनी दास्तान लिखता रह सकता है.
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