गजब की जिद! 9 साल में 139 बार फेल हुए, फिर भी नहीं मानी हार, अब जाकर पास की ड्राइविंग परीक्षा

हार से डरने वालों के लिए ये बंदा किसी 'फरिश्ते' से कम नहीं, जिसने ड्राइविंग लाइसेंस के जुनून में 9 साल और 138 नाकामियां कुर्बान कर दीं. जब कंप्यूटर स्क्रीन ने 139वीं बार 'Pass' कहा, तो मानो पोलैंड की सड़कों ने भी इस जिद्दी मुसाफिर के इस्तकबाल में पलकें बिछा दी हों.

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138 बार मिली 'नाकामी', फिर भी नहीं डिगा हौसला...इस बंदे ने 9 साल बाद कर दिखाया कमाल!
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Poland man 139 attempts driving test: क्या आप एक-दो बार फेल होने पर हिम्मत हार जाते हैं? पोलैंड के इस शख्स की कहानी पढ़कर आप दंग रह जाएंगे. ड्राइविंग लाइसेंस पाने के जुनून में इस बंदे ने 9 साल लगा दिए और 138 बार फेल होने के बाद आखिरकार 139वें प्रयास में कामयाबी हासिल की. करीब पौने दो लाख रुपये फूंकने के बाद मिली इस जीत की कहानी सोशल मीडिया पर तूफान मचा रही है.

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कहते हैं कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, लेकिन पोलैंड के टार्नोव शहर के इस शख्स ने तो इस कहावत को एक अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है. साल 2017 से यह शख्स ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 'थ्योरी एग्जाम' (कंप्यूटर टेस्ट) दे रहा था. दुनिया बदल गई, सरकारें बदल गईं, लेकिन इस शख्स का इरादा नहीं बदला. 138 बार कंप्यूटर की स्क्रीन पर 'Fail' देखने के बाद भी वह 139वीं बार एग्जाम सेंटर पहुंचा और इस बार उसने इतिहास रच दिया.

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लाइसेंस के चक्कर में लुटा दी गाढ़ी कमाई (Spent Thousands of Dollars for Driving License)

इस जिद की कीमत भी काफी भारी रही. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 9 सालों में परीक्षा फीस के तौर पर वह लगभग 1,800 यूरो (करीब 2,100 डॉलर या 1.75 लाख रुपये) खर्च कर चुका है. टार्नोव परीक्षा केंद्र के डायरेक्टर पावेल गुरगुल भी इस शख्स के जज्बे को देख हैरान रह गए. उन्होंने बताया कि यह बंदा हार मानने को तैयार ही नहीं था. दरअसल, उसकी नाकामयाबी के पीछे एक छोटी सी गलती थी...वह तैयारी के लिए टेस्ट का अधूरा वर्जन इस्तेमाल कर रहा था. जैसे ही उसने पूरा सिलेबस पढ़ा, उसे कामयाबी मिल गई.

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अभी असली इम्तिहान बाकी है मेरे दोस्त! (The Challenges of Practical Driving Test)

थ्योरी पास करना तो बस एक पड़ाव है, असली पहाड़ चढ़ना तो अभी बाकी है. अब इस शख्स को 'प्रैक्टिकल ड्राइविंग टेस्ट' यानी कार चलाकर दिखानी होगी. पोलैंड के नियमों के मुताबिक, अगर वह प्रैक्टिकल में फेल होता है, तो एक तय समय के बाद उसे फिर से थ्योरी एग्जाम देना पड़ सकता है. हालांकि, यह कोई रिकॉर्ड नहीं है...पोलैंड में ही एक शख्स को थ्योरी पास करने में 17 साल और 163 कोशिशें लगी थीं. यह कहानी हमें सिखाती है कि मंजिल चाहे कितनी भी दूर हो, अगर इरादा नेक और पक्का हो, तो देर-सबेर कामयाबी कदम चूम ही लेती है. अब बस दुआ कीजिए कि भाई साहब प्रैक्टिकल टेस्ट पहली बार में ही निकाल लें.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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