'बच्चा नाले में गिर गया', महिला की फर्जी कॉल से 3 घंटे में हो गया पूरा नाला साफ, अधिकारियों और लोगों ने दी ऐसी प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर एक अजीब घटना सामने आई है, जिसने अधिकारियों को हैरान कर दिया. दरअसल, एक महिला के झूठा दावा किया कि उसका बच्चा नाले में गिर गया है. महिला की कॉल के तुरंत बाद ही एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स शुरू कर दिया, जिससे सिर्फ तीन घंटे में पूरे नाले की सफाई हो गई.

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महिला की फर्जी कॉल से 3 घंटे में हुई नाले की सफाई
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नाली-नालों की सफाई को लेकर अक्सर नेताओं के बीच बयान-बाजी चलती है. सत्ता पक्ष साफ-सफाई के खूब दावे करता है तो विपक्ष साफ-सफाई नहीं होने के लेकर सवाल उठाता है. बारिश का मौसम आने से पहले हमेशा यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा में रहता है. ऐसा ही एक अजीब घटना सामने आई है, जिसने अधिकारियों को हैरान कर दिया. दरअसल, एक महिला के झूठा दावा किया कि उसका बच्चा नाले में गिर गया है. महिला की कॉल के तुरंत बाद ही एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स शुरू कर दिया, जिससे सिर्फ तीन घंटे में पूरे नाले की सफाई हो गई.

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कॉल से अलर्ट होकर, पुलिस और नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया, जिसमें मजदूरों और भारी उपकरणों को लगाकर नाले में तलाशी अभियान चलाया गया. घंटों की खोज के बाद, पता चला कि वहां कोई बच्चा था ही नहीं, कॉल फर्जी थी, जबकि अधिकारियों ने इमरजेंसी संसाधनों के दुरुपयोग पर हैरानी और गुस्सा जताया. महिला की इस फर्जी कॉल से पूरा नाला घंटों में साफ हो गया, जिसके बाद अब इस मामले में सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

दरअसल, मामला यूपी के मेरठ का बताया जा रहा है. जहां एक महिला ने कॉल कर दावा किया कि उसका बच्चा नाले में गिर गया. महिला की कॉल के बाद मेरठ पुलिस और नगर निगम अधिकारियों ने एक बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया. शिकायत मिलते ही तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स दिया गया और पुलिस और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं. भारी मशीनरी लगाई गई और नाले को लगभग तीन घंटे तक अच्छी तरह से साफ किया गया और तलाशा गया. अधिकारियों ने कीचड़ और मलबे को छाना और समय बीतने के साथ तलाशी का दायरा बढ़ाया. इतने लंबे ऑपरेशन के बावजूद वहां कुछ नहीं मिला. शुरुआती जांच से अब पता चलता है कि शिकायत झूठी हो सकती है, जो कथित तौर पर अधिकारियों पर इलाके के लंबे समय से उपेक्षित खुले नाले को साफ करने का दबाव बनाने के लिए की गई थी. इस घटना ने मेरठ में नागरिक बुनियादी ढांचे की स्थिति पर फिर से ध्यान खींचा है.

निवासियों ने सवाल उठाया कि खतरनाक खुले नाले बिना ढके और खराब रखरखाव वाले क्यों रहते हैं और जब तक कोई इमरजेंसी रिपोर्ट नहीं की जाती, तब तक नियमित सफाई क्यों नहीं की जाती? कई लोगों ने बताया कि अगर संकट के समय घंटों के भीतर भारी मशीनरी का इंतजाम किया जा सकता है, तो दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इसका नियमित रूप से भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए. जब ऑपरेशन के वीडियो ऑनलाइन सर्कुलेट हुए, तो कई निवासियों ने गुस्से और व्यंग्य के साथ प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने कहा कि ऐसा लगता है कि बुनियादी नागरिक काम करवाने का यही एकमात्र तरीका है और कमेंट्स में पूछा गया कि क्या अब नालों की सफाई के लिए एक नकली इमरजेंसी की जरूरत है.

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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