Japan Worlds Biggest Nuclear Power Plant: साल 2011 में जापान के फुकुशिमा तट पर आई भीषण सुनामी ने देश को हिला कर रख दिया था. इस प्राकृतिक आपदा में करीब 18,000 लोगों की मौत हुई थी. हालांकि, सुनामी के बाद फुकुशिमा के न्यूक्लियर रिएक्टर प्लांट को भी भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे रेडिएशन फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था. जापान के काशीवाजाकी-कारीवा न्यूक्लियर प्लांट (Kashiwazaki-Kariwa nuclear power) को 2011 के फुकुशिमा हादसे (2011 Fukushima disaster) के बाद पहली बार चालू किया गया है. हालांकि, सिर्फ एक रिएक्टर काम करेगा, लेकिन यह दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र माना जाता है.
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स्थानीय लोगों की अनिश्चितता और विरोध (Japan energy crisis)
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, सुनामी के झटकों से रिएक्टर की कूलिंग सिस्टम फेल हो गई थी. हालात ऐसे बन गए थे कि अगर समय रहते कदम न उठाए जाते, तो रेडिएशन बड़े इलाके में फैल सकता था. इसी डर के चलते जापान सरकार ने दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट को पूरी तरह बंद कर दिया था. इसके बाद देश ने न्यूक्लियर एनर्जी पर दोबारा सोचने का फैसला किया. काशीवाजाकी-कारीवा के आसपास 60 प्रतिशत लोग प्लांट के पुनः चालू होने के खिलाफ हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि, सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और भूकंप का खतरा अभी भी बना हुआ है. हाल ही में बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं.
जापान की ऊर्जा जरूरत और परमाणु ऊर्जा (Japan Energy Needs and Nuclear Power)
जापान की बढ़ती ऊर्जा मांग और कार्बन उत्सर्जन कम करने की योजना के चलते सरकार परमाणु ऊर्जा पर फिर से जोर दे रही है. प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने इस कदम का समर्थन किया है. 15 साल पहले हुई त्रासदी की छाया अब भी जिंदा है और जापान के लिए यह एक बड़ा जोखिम और अवसर दोनों है. पर्यावरण, सुरक्षा और ऊर्जा के बीच संतुलन बनाना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है.
15 साल बाद दोबारा शुरुआत क्यों? (Why Japan Restarted the Nuclear Plant Now)
अब 15 साल बाद जापान ने सख्त सुरक्षा जांच और नए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के बाद इस न्यूक्लियर प्लांट को फिर से शुरू किया है. बढ़ती बिजली की मांग, ऊर्जा संकट और कार्बन उत्सर्जन घटाने की मजबूरी ने सरकार को यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया. अधिकारियों का कहना है कि अब रिएक्टर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं.
फुकुशिमा हादसा और सुनामी की तबाही (Fukushima Disaster and Tsunami Impact)
यह फैसला सिर्फ जापान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम है. यह दिखाता है कि न्यूक्लियर एनर्जी को लेकर देशों का नजरिया बदल रहा है और सुरक्षा के साथ इसका इस्तेमाल फिर से चर्चा में है. फुकुशिमा की सुनामी ने जापान को गहरा जख्म दिया था, लेकिन 15 साल बाद उसी दर्द से सीख लेकर देश ने ऊर्जा भविष्य की नई राह चुनी है. दुनिया अब इस फैसले पर बारीकी से नजर रखे हुए है.
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