सावधान! आपके टूथपेस्ट में 'नमक' हो न हो, जहर जरूर हो सकता है! खरीदने से पहले ये 3 बातें जान लीजिए, वरना पछताएंगे!

दांतों की झनझनाहट मिटाने वाला 'सेंसोडाइन' अब खुद एक सिरदर्द बन गया है, क्योंकि दिल्ली की एक फैक्ट्री में पेस्ट के नाम पर जहर की पुड़िया पैक हो रही थी. मुस्कान पर ताला लगने से पहले ये जान लीजिए कि आपके ब्रश पर जो पेस्ट सज रहा है, वो असली है या किसी 'हरिओम' की जालसाजी का नया कारनामा.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
नकली पेस्ट का 'काला' कारोबार, हजारों ट्यूब्स बरामद, पुलिस ने बताया कैसे पहचानें असली माल
SOCIAL MEDIA

Fake toothpaste identification tips: अगर आप भी दांतों की झनझनाहट मिटाने के लिए आंख बंद करके पेस्ट खरीदते हैं, तो रुक जाइए...दिल्ली पुलिस ने एक ऐसी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है जहां 'सेंसोडाइन' के नाम पर मौत का सामान पैक हो रहा था. 130 किलो नकली पेस्ट और हजारों ट्यूब्स देखकर पुलिस के भी होश उड़ गए. कहीं आप भी तो सुबह-सुबह अपने मसूड़ों के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे? जान लीजिए असली और नकली की पहचान वरना लेने के देने पड़ सकते हैं.

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को छापेमारी कर जालसाजों के एक ऐसे ठिकाने का पर्दाफाश किया है, जो आपकी मुस्कान छीनने की तैयारी में थे. हरिओम मिश्रा नाम का एक शख्स 'सेंसोडाइन' जैसे बड़े ब्रांड के नाम पर नकली पेस्ट का धंधा चला रहा था. पुलिस ने वहां से 1,800 भरी हुई ट्यूब्स और करीब 10,000 खाली डिब्बे जब्त किए हैं. सोचिए, ये नकली माल छोटी दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए आपके वॉशबेसिन तक पहुंचने ही वाला था.

ये भी पढ़ें:-न पहचान, न कोई रिश्ता! नर्स ने जिगर का टुकड़ा देकर बचाई 8 साल के मासूम की जान, लोग बोले- फरिश्ते ऐसे ही होते हैं

कैसे पहचानें 'असली' और 'नकली' का फर्क? (How to Spot Real vs Fake Toothpaste?)

बाजार में खरीदारी करते वक्त अपनी 'तीसरी आंख' खुली रखिए. असली ब्रांड की पैकेजिंग एकदम चकाचक और प्रीमियम होती है, जबकि नकली वाले अक्सर स्पेलिंग में 'लोचा' कर देते हैं. अगर डिब्बे पर छपाई धुंधली है या मैन्युफैक्चरर का पता गायब है, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला है. ब्रांडेड टूथपेस्ट का बारकोड हमेशा साफ होता है, जैसे कोलगेट के लिए अक्सर 35000 से शुरू होने वाला कोड चेक करें. ऐप से स्कैन करना सबसे बढ़िया तरीका है.

Advertisement

Photo Credit: social media

रंगीन डिब्बों का भ्रम और कड़वा सच (The Myth of Color Squares and Hard Truths)

इंटरनेट पर एक अफवाह खूब उड़ती है कि ट्यूब के नीचे बना नीला या हरा चौकोर डिब्बा पेस्ट के 'नेचुरल' या 'केमिकल' होने का सबूत है. ये बिल्कुल बकवास बात है. असल में ये 'आई मार्क' होते हैं, जो सिर्फ मशीनों को ट्यूब काटने और सील करने का इशारा देते हैं. असलियत जाननी है तो हमेशा नामी फार्मेसी या भरोसेमंद स्टोर से ही सामान लें. अगर पेस्ट इस्तेमाल करते वक्त झाग कम बने या मसूड़ों में जलन हो, तो उसे तुरंत कूड़ेदान के हवाले करें. सस्ते के चक्कर में अपनी सेहत से समझौता करना भारी पड़ सकता है. हमेशा ब्रांड की वेबसाइट पर जाकर बैच नंबर जांचें और शक होने पर हेल्पलाइन का सहारा लें. याद रखिए, दांत सलामत तो स्वाद सलामत.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Iran Israel War: ईरान के जबड़े से पायलट निकाल लाए Trump! | Bharat Ki Baat Batata Hoon