Man quits 42 LPA job for peace of mind: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में शिवम लखनपाल ने अपनी जिंदगी का वो सच बताया, जो आज के दौर के कई युवाओं को छू गया. शिवम ने कुछ महीने पहले 42 लाख सालाना पैकेज वाली कॉरपोरेट नौकरी छोड़ दी. वीडियो की शुरुआत होती है एक लाइन से 'I quit my 42 LPA job.' शिवम कहते हैं कि इतनी बड़ी सैलरी के बावजूद वह अंदर से खुद को कमजोर और जरूरतमंद महसूस करते थे. ऑफिस की चमक-दमक थी, लेकिन दिल में सुकून नहीं था
'जब अपनी ही कार पर हक महसूस न हो' (high salary mental health)
शिवम ने बताया कि नौकरी के दौरान जब उन्होंने 18 लाख की कार खरीदी, तो पहली बार उसमें बैठकर भी उन्हें लगा कि वह इसके लायक नहीं हैं, उनके शब्दों में, 'मुझे नहीं लगा कि मैं इसे ड्राइव करने के लिए मर्दाना महसूस कर रहा हूं.' यही एहसास धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास को खोखला करता गया. पैसा था, पर खुशी गायब थी.
नौकरी छोड़ी, जिंदगी मुस्कुरा उठी (Shivam Lakhanpal story)
नौकरी छोड़ने के बाद शिवम की जिंदगी ने नया मोड़ लिया. अब वही कार उन्हें बैटमोबाइल जैसी लगती है और उनके चेहरे पर सुकून साफ दिखता है. सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पहले और बाद के वीडियो देखकर बदलाव को महसूस किया. एक यूजर ने लिखा, 'तुम अब ज्यादा शांत और जिंदा लगते हो.' किसी ने कहा, 'ये असली हीलिंग है...फ्री विल के साथ जीना.'
जब मोटी सैलरी भी हल्की लगने लगे (corporate job stress India)
आज जब हाई सैलरी, कॉरपोरेट जॉब और पैकेज को सफलता का पैमाना माना जाता है, शिवम की कहानी एक जरूरी सवाल उठाती है कि, क्या पैसा ही असली दौलत है. यह खबर उन युवाओं के लिए खास है, जो अंदर से टूटकर भी बाहर से सफल दिखते हैं. शिवम लखनपाल की कहानी याद दिलाती है कि असली अमीरी मन की शांति और अपनी जिंदगी पर हक महसूस करने में है. पैसा रास्ता आसान कर सकता है, मंजिल नहीं बन सकता.
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