एक्वेरियम साफ करते वक्त उछलकर बच्चे के मुंह में घुस गई जिंदा मछली, डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

इंदौर में एक 1 साल के बच्चे के गले में जिंदा मछली फंसने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक्वेरियम साफ करते वक्त हुई इस घटना के बाद डॉक्टरों ने 30 मिनट की जटिल सर्जरी कर बच्चे की जान बचाई. जानिए पूरा मामला और डॉक्टरों ने क्या चेतावनी दी.

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उछलकर बच्चे के मुंह में घुस गई जिंदा मछली, फिर जो हुआ उसने सबको डरा दिया

घर में छोटे बच्चों के साथ कभी-कभी मामूली लगने वाली चीजें भी खतरनाक साबित हो सकती हैं. इंदौर से सामने आया एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला लोगों को हैरान कर रहा है, जहां खेल-खेल में एक जिंदा मछली 1 साल के बच्चे के गले में जा फंसी. इस घटना ने कुछ ही पलों में सामान्य स्थिति को मेडिकल इमरजेंसी में बदल दिया.

कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना इंदौर में 3 अप्रैल को हुई. घर में बच्चे के बड़े भाई-बहन एक्वेरियम साफ कर रहे थे. उन्होंने जाल (नेट) की मदद से सजावटी मछलियां बाहर निकाली थीं और पास में खेल रहे थे. इसी दौरान अचानक एक मछली उछलकर सीधे 1 साल के बच्चे के मुंह में चली गई, जब वह हंस रहा था.

अस्पताल में मची अफरा-तफरी

घटना के तुरंत बाद परिवार बच्चे को महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) लेकर पहुंचा. डॉक्टरों ने जांच में पाया कि करीब 3 इंच लंबी मछली बच्चे के गले में फंसी हुई थी और उसकी सांस की नली (airway) को ब्लॉक कर रही थी. डॉक्टरों के मुताबिक, मछली जिंदा थी और लगातार हिल रही थी. इससे बच्चे के गले में चोट आई. मुंह से खून और लार निकल रही थी. बच्चे को सांस लेने में दिक्कत और घबराहट हो रही थी.

30 मिनट तक चली सर्जरी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की 6 सदस्यीय टीम ने तुरंत इमरजेंसी सर्जरी शुरू की. यह प्रक्रिया करीब 30 मिनट तक चली और काफी जटिल थी, क्योंकि डॉक्टरों को बिना ज्यादा नुकसान पहुंचाए मछली निकालनी थी. आखिरकार सर्जरी सफल रही और मछली को बाहर निकाल लिया गया, हालांकि तब तक वह मर चुकी थी. सर्जरी के बाद बच्चे को कुछ दिनों तक अस्पताल में निगरानी में रखा गया. धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार हुआ और बाद में उसे स्वस्थ हालत में डिस्चार्ज कर दिया गया. डॉक्टरों ने बताया कि अब बच्चा पूरी तरह ठीक है.

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डॉक्टरों की चेतावनी

डॉक्टरों ने कहा कि ऐसे मामले बहुत दुर्लभ होते हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं. बच्चों की सांस की नली बहुत पतली होती है. वे खुद से ऐसी चीजें बाहर नहीं निकाल पाते. थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा बन सकती है. यह मामला मध्य भारत में अपनी तरह का पहला बताया जा रहा है.

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