Kartik Modi success story: कहते हैं न कि 'हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं', लेकिन आज का बाजीगर कोई फिल्मी हीरो नहीं बल्कि कार्तिक मोदी नाम का एक आम लड़का है. कॉलेज में फेल होने का दाग लगा, तो दुनिया ने ताने दिए होंगे, पर इस बंदे ने अपनी किस्मत की ऐसी पलटी मारी कि आज माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियां इसके पीछे लाइन लगा कर खड़ी हैं.
कॉलेज के दिनों में जब बाकी दोस्त प्लेसमेंट और पैकेज की बातें कर रहे थे, तब कार्तिक मोदी के हाथ में एक 'बैकलॉग' का पर्चा था. डेटा स्ट्रक्चर्स और एल्गोरिदम (DSA) जैसे टेढ़े सब्जेक्ट में फेल होने के बाद किसी का भी कलेजा कांप जाए, पर कार्तिक ने हार मानने के बजाय 'शून्य' से शुरुआत की. उन्होंने अपनी ईगो को ताक पर रखा और बेसिक किताबों को फिर से पन्ना-दर-पन्ना पढ़ना शुरू किया.
फेलियर से Google तक का सफर (The Journey from Failure to Google)
उनकी सफलता का कोई गुप्त मंत्र नहीं था, बस एक सादा सा उसूल था...'कंसिस्टेंसी'. कार्तिक ने लंबी और उबाऊ पढ़ाई के बजाय हर दिन सिर्फ एक या दो क्वालिटी सवाल हल करने की आदत डाली. उन्होंने इंटरव्यू रिजेक्शन को दिल से लगाने के बजाय उसे एक फ्री कोचिंग क्लास की तरह लिया. हर 'ना' ने उन्हें बताया कि अभी कहां सुधार की गुंजाइश बाकी है. नतीजा? आज उनके पास एक या दो नहीं, बल्कि गूगल, उबर, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन जैसे टेक दिग्गजों के ऑफर लेटर हैं. वह भी सीधा यूनाइटेड किंगडम (UK) से...उनकी यह कहानी इंटरनेट पर आग की तरह फैल रही है, क्योंकि यह बताती है कि डिग्री के नंबरों से ज्यादा आपकी 'रगड़' (मेहनत) मायने रखती है.
ये भी पढ़ें:-दौलत, कैंसर और 28 साल छोटी बीवी...चीनी रईस ने वसीयत में लुटाए 405 करोड़, भड़की पहली पत्नी, बच्चों में मची खलबली
छोटे कदम और बड़ी कामयाबी (Indian developer job offers)
कार्तिक का मानना है कि कॉलेज के ग्रेड आपका भविष्य तय नहीं करते. अगर आपमें गिरने के बाद वापस उठने का माद्दा है, तो दुनिया की कोई भी दीवार आपको रोक नहीं सकती. आज के दौर में जहां बच्चे थोड़े से स्ट्रेस में टूट जाते हैं, वहां कार्तिक का यह 'देसी स्वैग' और मेहनत वाला अंदाज एक नई उम्मीद जगाता है.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)













