चीन की चुनौती देने को तैयार है अमेरिका, 2.5 अरब पिक्‍सल कैमरे वाला स्‍पेस टेलीस्‍कोप लॉन्‍च करेगा

चीन भारत समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियों को चुनौती दे रहा है, जिसमें अमेरिका और यूरोपिय संघ भी शामिल हैं. हाल में चीनी वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन और ईंधन को पैदा करने की क्षमता है. 

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चीन भारत समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियों को चुनौती दे रहा है, जिसमें अमेरिका और यूरोपिय संघ भी शामिल हैं. हाल में चीनी वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन और ईंधन को पैदा करने की क्षमता है. चीन के Chang'e 5 स्‍पेसक्राफ्ट द्वारा लाई गई चंद्रमा की मिट्टी का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे. चीन मंगल मिशन पर भी काम कर रहा है. यही नहीं, अब उसकी तैयारी साल 2023 तक अपना पहला बड़ा स्‍पेस टेलीस्‍कोप लॉन्‍च करने की है. इस टेलीस्‍कोप के जरिए चीन, अंतरिक्ष का सर्वेक्षण करना चाहता है. आकाशगंगाओं को एक्‍स्‍प्‍लोर करना चाहता है और तो और डार्क मैटर व डार्क एनर्जी के रहस्‍यों को उजागर करना चाहता है. चीन का यह टेलीस्‍कोप सीधे तौर पर अमेरिका और यूरोप के हबल टेलीस्‍कोप और हाल में लॉन्‍च किए गए जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप को टक्‍कर देगा.

space.com के मुताबिक, चीन की नेशनल एस्‍ट्रोनॉमिकल ऑब्‍जर्वेट्री के डेप्‍युटी डायरेक्‍टर लियू जिफेंग ने न्‍यूज एजेंसी सिन्हुआ को बताया है कि चीनी स्‍पेस स्‍टेशन टेलीस्कोप (CSST) एक ऑप्टिकल और अल्‍ट्रावॉयलेट स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री है. इसमें 6.6-फुट-व्यास का लेंस होगा, जो इसे हबल स्पेस टेलीस्‍कोप की टक्‍कर का बनाएगा. इसका रेजॉलूशन हबल के जितना होगा, लेकिन यह 350 गुना ज्‍यादा क्षेत्र को देख पाएगा.

इसका मतलब है कि चीनी स्‍पेस स्‍टेशन टेलीस्कोप 32 साल पुराने हबल टेलीस्‍कोप की तुलना में एक समय में आकाश के बहुत अधिक विस्तार से देख पाएगा. बताया जाता है कि इस टेलीस्‍कोप की मिशन लाइफ 10 साल की होगी और यह 2.5 अरब पिक्‍सल कैमरे के साथ आकाश के 40 फीसदी हिस्‍से को सर्वे करेगा. इस बीच, नासा ने हबल के सक्‍सेसर के तौर पर जिस जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को लॉन्च किया है, उसमें 21.3 फीट व्यास के साथ एक प्राइमरी मिरर है. 

बताया जाता है कि चीनी स्‍पेस स्‍टेशन टेलीस्कोप यानी CSST में हमारी आकाशगंगा के तारों की मैपिंग के लिए चार और इंस्‍ट्रुमेंट्स होंगे. ये धूमकेतु और एस्‍टरॉयड जैसी तेज स्‍पीड वाली चीजों का भी पता लगाएंगे और विशालकाय ब्लैक होल को स्‍टडी करेंगे.

गौरतलब है कि चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. वह इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन की तर्ज पर अपना अंतरिक्ष स्‍टेशन तैयार कर रहा है. हाल में इसके एक कार्गो जहाज को निर्माणाधीन स्‍पेस स्टेशन के साथ डॉक किया गया. कार्गो जहाज अगले चालक दल के लिए रिसर्च इक्विपमेंट और स्टेशन को मेंटेन करने के लिए स्पेयर पार्ट्स को सप्‍लाई कर रहा है.

 

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