बिना बिजली वाला 400 साल पुराना 'AC', आमेर किले का सुख निवास, जिसकी इंजीनियरिंग देख दुनिया हैरान

आज के दौर में जब ग्लोबल वॉर्मिंग और बिजली की खपत एक बड़ी समस्या बन चुकी है, आमेर का सुख निवास दुनिया के लिए 'इको-फ्रेंडली और सस्टेनेबल आर्किटेक्चर' का एक बेहतरीन मॉडल है. पढ़ें रोहन शर्मा की यह रिपोर्ट.

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आमेर महल का 'सुख निवास': 400 साल पुराना यह शाही कमरा बिना बिजली के आज भी कैसे रहता है AC की तरह ठंडा?
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Rajasthan News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर किले (Amber Fort) में एक ऐसा शाही कमरा है, जहां बिना बिजली और आधुनिक मशीनरी के प्राकृतिक रूप से AC जैसी ठंडक मिलती है. इसे सुख निवास (Sukh Niwas Palace) कहा जाता है. आज से लगभग 400 साल पहले, जब बिजली और एयर कंडीशनर का नामोनिशान नहीं था, राजपूत वास्तुकारों ने पीले-गुलाबी बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से इसे तैयार किया था. इसका डिजाइन इस तरह किया गया था कि बाहर चाहे जितनी भी लू चल रही हो, अंदर बैठे राजा को शिमला जैसी ठंडक का अनुभव होता था.

यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल यह इमारत वास्तुकला और वाटर मैनेजमेंट का एक अनोखा नमूना है.

मावठा झील का पानी और हवा का वो विज्ञान, जो बनता है 'नेचुरल AC'

इतिहास के दस्तावेजों के अनुसार, आमेर महल के इस सुख निवास का निर्माण कछवाहा शासक राजा मानसिंह प्रथम ने करवाया था, जिसका बाद में मिर्जा राजा जय सिंह ने जीर्णोद्धार किया. इस महल के बिना बिजली ठंडा रहने के पीछे पूरी तरह वैज्ञानिक दृष्टिकोण है:-

विंड टनल और वॉटर कैस्केड

महल की छत पर बने विशाल टैंक में नीचे स्थित मावठा सरोवर से पानी चढ़ाया जाता था. इसके बाद पश्चिमी हवाओं के रुख को ध्यान में रखकर पानी को संगमरमर की बारीक नालियों से झरने के रूप में नीचे गिराया जाता था. जब गर्म हवा इस पानी के ऊपर से गुजरती थी, तो वो तुरंत ठंडी हो जाती थी.

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चंदन के दरवाजों का कमाल

सुख निवास के प्रवेश द्वार पर चंदन की लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजे लगाए गए हैं. ये लकड़ी न सिर्फ ठंडक को कमरे के भीतर लॉक करके रखती है, बल्कि पानी की नमी से मिलकर पूरे कक्ष में एक भीनी-भीनी खुशबू बिखेरती है.

मोटी दीवारें में बनी संकरी खिड़कियां

चूने और संगमरमर के मिश्रण से बनी मोटी दीवारें बाहर की गर्मी को अंदर नहीं आने देतीं, जबकि संकरी खिड़कियां हवा के दबाव को बढ़ाकर कूलिंग इफेक्ट पैदा करती हैं.

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जब बाहर की गर्म हवा पानी की इन धाराओं और फव्वारों से टकराती, तो वो एकदम ठंडी होकर पूरे कमरे में फैल जाती थी.
Photo Credit: NDTV Reporter

सालों बाद फिर शुरू हुए सुख निवास के झरने

अगर आप इस चिलचिलाती गर्मी में जयपुर जा रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है. पुरातत्व विभाग ने 400 साल पुराने इस कूलिंग सिस्टम को पर्यटकों के लिए फिर शुरू कर दिया है.

आमेर महल के अधीक्षक राकेश छोलक ने NDTV से खास बातचीत में बताया, 'काफी सालों से बंद पड़े सुख निवास और शीश महल के झरनों को विभाग के मार्गदर्शन में वापस से शुरू कर दिया गया है. जो सिस्टम उस समय पूरी तरह मैनुअल चलता था, उसमें अब एक खास मैकेनिज्म तैयार करके उसे दोबारा रन किया गया है. इसका उद्देश्य यह है कि देश-विदेश से आने वाले सैलानी उस दौर के राजसी वैभव और बिना बिजली की आरामदायक जिंदगी को साक्षात महसूस कर सकें. इसके साथ ही चारबाग शैली के गार्डन के फव्वारे भी चालू कराए गए हैं.'

सालों से बंद पड़े सुख निवास के इन प्राकृतिक झरनों को प्रशासन ने एक खास मैकेनिज्म तैयार करके फिर से चालू करवा दिया है.
Photo Credit: NDTV Reporter

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पर्यटक नेहा बिंद्रा भी इसकी मुरीद हो गईं

हिमाचल प्रदेश से आमेर घूमने आईं पर्यटक नेहा बिंद्रा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'बाहर भयानक लू चल रही है, लेकिन जैसे ही आप सुख निवास के परिसर में कदम रखते हैं, शरीर को तुरंत राहत मिलती है. 400 साल पुरानी यह तकनीक आज के महंगे एयर कंडीशनर से कहीं बेहतर है.'

सैलानियों की सुरक्षा के लिए 200 से ज्यादा गार्ड तैनात

पर्यटन सीजन और गर्मी के दिनों में सुख निवास आमेर किले का सबसे व्यस्त पॉइंट बन जाता है. आमेर प्रशासन के मुताबिक, ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान से बचाने और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 160 होमगार्ड और 50 फायर सेफ्टी गार्ड्स को तीन अलग-अलग शिफ्टों में तैनात किया गया है. सुख निवास के ठीक सामने मुगल शैली का 'चारबाग बगीचा' और मावठा झील का नजारा सैलानियों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है.

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