- अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बताया कि एक अमेरिकी सबमरीन ने टॉरपीडो से ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया.
- यह जहाज भारत में हुए नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था.
- बताया गया कि हमला श्रीलंका के पास हिंद महासागर में हुआ.
दुनिया के इतिहास में समुद्र हमेशा शक्ति, व्यापार और रणनीतिक प्रभुत्व का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है. आज भी वैश्विक व्यापार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है. यही वजह है कि जब किसी संघर्ष की आंच समुद्र तक पहुंचती है, तो उसका असर केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहता. इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और राजनीति पर पड़ सकता है. हाल की घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि समुद्री युद्ध में पनडुब्बियों को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है.
पनडुब्बियां क्यों होती हैं सबसे घातक
सबसे पहले पनडुब्बियों की भूमिका को समझना जरूरी है. आधुनिक नौसैनिक युद्ध में इन्हें सबसे घातक हथियारों में गिना जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इनकी छिपकर काम करने की क्षमता. पनडुब्बियां समुद्र की गहराई में संचालित होती हैं, इसलिए उन्हें ढूंढ पाना बेहद कठिन होता है. कई बार अत्याधुनिक तकनीक भी उन्हें तुरंत पकड़ नहीं पाती. यही कारण है कि दुश्मन को अक्सर यह अंदाजा तक नहीं होता कि हमला किस दिशा से होने वाला है.
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर
यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है और यह तेल समुद्री मार्गों के जरिए ही देश तक पहुंचता है. अगर ये समुद्री रास्ते असुरक्षित हो जाएं, तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
भारतीय नौसेना की बढ़ती जिम्मेदारी
ऐसी परिस्थितियों में भारतीय नौसेना की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है. नौसेना को समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ती है और कई बार व्यापारिक जहाजों को भी सुरक्षा प्रदान करनी होती है.
समुद्री सुरक्षा: भविष्य की बड़ी चुनौती
अंततः यह कहा जा सकता है कि समुद्री युद्ध केवल जहाजों के बीच की लड़ाई नहीं होता. इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक फैलता है. इसलिए आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा दुनिया के सामने सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौतियों में से एक बनी रह सकती है.














