हमास ने छोड़ी गाजा की सत्ता, आसान भाषा में समझिए उसके इस ऐलान का मतलब क्या है

गाजा पर करीब दो दशक तक शासन करने के बाद हमास ने वहां की सत्ता छोड़ने का फैसला किया है. उनसे इस समय यह फैसला क्यों किया, पढ़िए इस कहानी में.

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नई दिल्ली:

हमास ने गाजा की सत्ता छोड़ने की घोषणा की है. उसने कहा है कि वह अपनी सरकार को भंग कर शासन नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) को सौंप देगा. हमास ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ युद्धविराम समझौते के बाद भी इजरायल ने गाजा में हमले करना बंद नहीं किया है. गाजा पर इजरायली हमले में अब तक 73 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब पौने दो लाख लोग जख्मी हुए हैं. करीब दो साल तक चली लड़ाई के बाद दोनों पक्षों ने मिस्र में लंबी बातचीत के बाद एक युद्धविराम समझौता किया था. इसमें कैदियों की अदला-बदली भी शामिल थी. 

अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ युद्धविराम समझौता आगे नहीं बढ़ पा रहा है. इजरायल गाजा पर लगातार गोला-बारूद बरसा रहा है. सत्ता छोड़ने के बाद हमास ने उम्मीद जताई है कि इजरायल अब गाजा पर और हमले नहीं करेगा. उसका कहना है कि उसके सत्ता से हटने के बाद गाजा से इजरायली सेना हटेगी, राहत सामग्री की आपूर्ति फिर शुरू होगी और इससे लोगों को भूख से राहत मिलेगी.

हमास चाहता क्या है

वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता छोड़कर हमास इजरायल पर दबाव बनाना चाहता है. वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह संदेश देना चाहता है कि वह गाजा की सत्ता छोड़ने और युद्ध से तबाह इलाके के शांतिपूर्ण पुनर्निर्माण के लिए तैयार है.
हमास ने कहा भी है कि उसके इस फैसले से इजरायल के हमले रुकेंगे, गाजा से इजरायली सेना हटेगी, राहत सामग्री का वितरण फिर शुरू होगा और लोगों को भूख से राहत मिलेगी.

दरअसल अमेरिका की मध्यस्थता से अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम के बाद भी गाजा में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं अक्टूबर 2023 में इजरायल की ओर से युद्ध शुरू किए जाने के बाद से अब तक कुल 73 हजार से अधिक लोगों की मौत गाजा में हो चुकी है. गाजा के करीब 70 फीसद इलाके पर अभी भी इजरायल का नियंत्रण है. इस वजह से अधिकांश फिलस्तीनी बहुत छोटे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में दिन गुजार रहे हैं.

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हमास और गाजा का क्या संबंध है

गाजा भूमध्य सागर के तट पर स्थित 41 किलोमीटर लंबी और 10 किलोमीटर चौड़ी एक पट्टी है. इसकी सीमा मिस्र और इसरायल से लगी हुई है. गाजा पट्टी पर हमास का 2007 से शासन है.हमास का पूरा नाम हरकत अल-मुकावमा अल-इस्लामिया है. दरअसल फिलस्तीन में 2006 में संसदीय चुनाव कराए गए थे. इसमें कट्टरपंथी माने जाने वाले हमास ने संसद की 132 में 74 सीटें जीत ली थीं. वहीं धर्मनिरपेक्ष माने जाने वाले महमूद अब्बास की फतह पार्टी केवल 45 सीटें ही जीत पाई थी. इससे वहां असंतोष बढ़ा. इस असंतोष ने हिंसक रूप ले लिया. हमास ने 2007 में गाजा से फतह के सैनिकों को खदेड़ कर अपना कब्जा जमा लिया. इससे फिलिस्तीन गाजा और वेस्ट बैंक के रूप में बंट गया. गाजा पर हमास का तभी से कब्जा था. 

इजरायल के हमले में गाजा की करीब सभी इमापरते तबाह हो चुकी हैं.
Photo Credit: AP

हमास ने क्या किया है?

हमास के प्रशासनिक प्रमुख मोहम्मद अल फर्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद अब गाजा का प्रशासन नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा को सौंपा जाएगा.फर्रा के इस्तीफे के बाद केवल तकनीकी और सरकारी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी ही अपने पदों पर बने रहेंगे. इसका मकसद अस्पताल, पानी, बिजली और अन्य जरूरी सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहें.

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एनसीएजी क्या है और क्या करेगी

एनसीएजी का गठन जनवरी 2026 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 और अमेरिका समर्थित 20-सूत्रीय शांति योजना के तहत किया गया था. यह एक प्रशासनिक संस्था है. इसका नेतृत्व गैर-राजनीतिक फिलस्तीनी विशेषज्ञों के पास है. इस समय इसका मुख्यालय मिस्र की राजधानी काहिरा में है, क्योंकि इजरायल ने अभी तक इसके सदस्यों को गाजा में घुसने की इजाजत नहीं दी है. यह समिति गाजा के लोगों के लिए प्रमुख सेवा, शासन और विकास संबंधी विभागों की देखरेख करेगी.इस समिति में शामिल सभी लोग फिलस्तीनी हैं. डॉक्टर अली शाथ इसके मुख्य आयुक्त हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिविल इंजीनियर शाथ ऊर्जा, परिवहन, वक्फ एवं धार्मिक सेवाओं का कामकाज देखेंगे. उनके अलावा इस समिति में ये लोग शामिल हैं-

  1. अब्देल करीम अहमद अशूर समिति में कृषि आयुक्त हैं. 
  2. उमर शमाली समिति में संचार और डिजिटल मामलों के आयुक्त हैं. 
  3. हना हन्ना निकोला तराजी समिति में सामाजिक सुरक्षा आयुक्त हैं. 
  4. आयद अवनी अबू-रमजान को समिति में अर्थव्यवस्था, उद्योग और व्यापार के आयुक्त हैं. 
  5. डॉक्टर जबर इब्राहिम अल-दाउर समिति में शिक्षा आयुक्त हैं.
  6. डॉ. बशीर रायस समिति में वित्त और कोषागार आयुक्त हैं. 
  7. डॉ. ऐद महमूद याघी समिति में स्वास्थ्य आयुक्त हैं.
  8. सामी नास्मान आंतरिक मामलों के आयुक्त
  9. अदनान सलेम अबू वर्दा समिति के न्याय आयुक्त हैं. 
  10. ओसामा अल-सादवी समिति में भूमि एवं आवास आयुक्त हैं.
  11. डॉ. अली शेहदा बरहूम समिति में जल, उपयोगिता और स्थानीय प्राधिकरण आयुक्त हैं. 
  12. होसनी अल-मघानी समिति में नागरिक शांति आयुक्त हैं. 

एनसीएजी का काम क्या है 

  • स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से शुरू करना.
  • शिक्षा व्यवस्था बहाल करना.
  • पानी और अन्य बुनियादी सेवाओं को सामान्य बनाना.
  • पुलिस के जरिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना.

साल 2027 में गाजा का प्रशासन फिलस्तीनी प्राधिकरण को सौंपा जा सकता है. हालांकि इस समिति ने कहा है कि वह तभी जिम्मेदारी संभालेगी, जब उसे पूरी कानूनी और प्रशासनिक शक्तियां मिलेंगी. समिति ने सुरक्षा व्यवस्था को भी एक ही प्रशासन के अधीन लाने को कहा है. 

क्या हमास हथियार छोड़ देगा?

अभी के हालात में इस बारे में कुछ भी कह पाना असंभव होगा. हालांकि अमेरिका और इजरायल यह चाहते हैं कि हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ दे. हमास ने अपनी घोषणा में हथियार छोड़ने की बात साफ तौर पर नहीं कही है. उसने केवल इतना भर कहा है कि वह नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां सौंपने को तैयार है. इजरायल ने इसे हमास की चाल बताया है. उसका कहना है कि अगर हमास के पास हथियार बने रहते हैं, तो असली ताकत उसी के पास रहेगी. इससे नई नागरिक सरकार स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएगी.

हमास ने यह फैसला अभी क्यों लिया?

हमास यह दिखाना चाहता है कि वह सत्ता छोड़ने के लिए तैयार है. वह इजरायल को शांति प्रक्रिया में बाधा के तौर पर दिखाना चाहता है. उसकी कोशिश है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसके इस कदम को सकारात्मक मानते हुए इजरायल पर शांति प्रक्रिया लागू करने के लिए दबाव डालें.

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गाजा में युद्धविराम की स्थिति क्या है?

इजरायल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में हुआ युद्धविराम समझौते के बाद भी शांति वार्ता ठप पड़ी हुई है. इसकी वजह यह है कि इजरायल चाहता है कि हमास हथियार छोड़ दे, वहीं हमास यह चाहता है कि इजरायल पहले गजा से अपनी सेना हटाए और मानवीय सहायता की पहुंच आसान बनाए और विस्थापितों को उनके घर लौटने दिया जाए. हमास आरोप लगाता रहा है कि इजरायल समझौते की शर्तों का पालन नहीं कर रहा है.

इन परिस्थितियों को देखते हुए हमास का नया कदम महत्वपूर्ण तो है. लेकिन अभी यह कहना मुश्किल होगा कि इससे गाजा में शांति लौटेगी या नहीं. 

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