- मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष परमाणु संवेदनशील ठिकानों के करीब हमलों के कारण WHO ने चेतावनी दी है
- ईरान और इजरायल के परमाणु केंद्रों के आसपास हालिया हमलों से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है
- इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने रेडिएशन बढ़ने के कोई संकेत नहीं पाए हैं, लेकिन खतरे की संभावना बनी हुई है
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बड़ी चेतावनी दी है. WHO प्रमुख डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने युद्ध के परमाणु आपदा में बदलने की आशंका जताते हुए दुनिया को आगाह किया है. उन्होंने कहा है कि यह युद्ध अब एक खतरनाक मोड़ में प्रवेश कर चुका है, क्योंकि हमले सीधे परमाणु संवेदनशील ठिकानों के करीब हो रहे हैं.
परमाणु ठिकानों के पास गिरे बम, मची खलबली
ईरान के नतांज एनरिचमेंट कॉम्प्लेक्स और इजरायल के डिमोना शहर के आसपास हुए हालिया हमलों ने स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है. यहां दोनों देशों के परमाणु केंद्र स्थित है. WHO ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि ऐसे हमलों से हालात बेकाबू हो सकते हैं.
क्या कहती है IAEA की रिपोर्ट?
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) इन घटनाओं की बारीकी से जांच कर रही है. राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी तरह के असामान्य या बढ़े हुए रेडिएशन के संकेत नहीं मिले हैं. हालांकि, डॉ. टेड्रोस ने चेताया है कि परमाणु साइटों को निशाना बनाना सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक लगातार बढ़ता हुआ खतरा है. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है.
who warns nuclear threat
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आम इंसान और बच्चे चुका रहे युद्ध की सबसे बड़ी कीमत
फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ यह युद्ध अब पूरे क्षेत्र में फैल चुका है. इसका मानवीय परिणाम बेहद भयानक रहा है. स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, ईरान में 1,300 से ज्यादा और लेबनान में कम से कम 570 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों घायल हैं. वहीं इजरायल में भी कई मौतें हुई हैं और 2,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.
सबसे ज्यादा दिल दहलाने वाला आंकड़ा बच्चों का है. अब तक 1800 से ज्यादा बच्चे इस युद्ध में मारे गए हैं या घायल हुए हैं.हाल ही में दक्षिणी इजरायल के डिमोना में हुए मिसाइल हमले में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल थे.
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जंग का ग्लोबल इम्पैक्ट
इस युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है. खाड़ी देशों में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों से तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे दुनिया भर में कीमतें आसमान छूने लगी हैं. अस्पतालों और स्कूलों जैसे नागरिक क्षेत्रों पर हमलों ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है.
WHO भी अलर्ट मोड में
किसी भी संभावित परमाणु आपदा से निपटने के लिए WHO भी अलर्ट मोड पर आ गया है. डॉ. टेड्रोस के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से WHO ने 13 देशों में अपने स्टाफ और UN कर्मियों को किसी भी परमाणु स्वास्थ्य खतरे से निपटने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी है. WHO प्रमुख ने सभी पक्षों से अपनी सैन्य कार्रवाइयों पर संयम बरतने की कड़ी अपील की है ताकि किसी भी परमाणु दुर्घटना से बचा जा सके. उन्होंने नेताओं से आम नागरिकों की सुरक्षा और तनाव कम करने को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हुए कहा,'शांति ही सबसे अच्छी दवा है.'
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