पाकिस्तान में दिख रहा Gen-Z का गुस्सा, जानिए उस स्टूडेंट को जिसके लेख से मची खलबली

दरअसल जोरैन के इस आर्टिकल जेन-Z के मन की बात थी. उन्होंने यह लिखा था कि कैसे पाकिस्तान के Gen Z, सरकार और सेना के बहकावे में नहीं आ रहे हैं.

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ज़ोरैन निज़ामानी.
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  • जोरैन निज़ामानी ने "इट इज ओवर" शीर्षक से एक लेख लिखा, जिसे डिलीट करवा दिया गया था.
  • इस लेख में उन्होंने पाकिस्तान युवाओं की निराशा का जिक्र किया था, डिलीट कराने के बाद भी यह वायरल हुआ.
  • लेख में जोरैन ने कहा कि देशभक्ति भाषणों से नहीं बल्कि रोजगार और समान अवसर मिलने से उत्पन्न होती है.
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Gen-Z का गुस्सा कुछ दिनों पहले नेपाल में दिखा था. अंजाम यह हुआ कि सत्ता बदल गई. बांग्लादेश में पिछले साल हुए सत्ता परिवर्तन के पीछे भी जेन-जी की नाराजगी को एक बड़ी वजह बताया गया. अभी भी नेपाल, बांग्लादेश जैसे देश स्थिर नहीं हो सके है. इस बीच लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा पाकिस्तान भी जेन-जी की नाराजगी की जद में आता नजर आ रहा है. हाल ही में पाकिस्तान में एक छात्र के लिखे आर्टिकल को लेकर भारी बवाल मचा है. इस आर्टिकल  में युवाओं की नाराजगी को लेकर चर्चा की गई है. जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान में भी जेन-जी नाराज हैं. 

दरअसल अमेरिका में पढ़ रहे पाकिस्तान के एक छात्र जोरैन निजामानी (Zorain Nizamani) के लिखे लेख पर खलबली मची है. इस पर इतना हंगामा मचा कि कथित तौर पर सेना के आदेश पर इस लेख को डिलीट करवा दिया गया. लेकिन उसके बाद भी वह आर्टिकल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
 

अब ज़ोरैन निज़ामानी पाकिस्तान के यूथ आइकॉन बन चुका हैं. आखिर जोरैन निजामानी के लेख में ऐसा क्या लिखा था? जोरैन निजामानी है कौन, आइए जानते हैं पूरी कहानी.

'इट इज ओवर', नामक आर्टिकल से मची खलबली

दरअसल जोरैन निजामानी ने एक आर्टिकल लिखा, जिसका टाइटल था- 'इट इज ओवर' (It is Over). यह ओपिनियन आर्टिकल 1 जनवरी को अंग्रेजी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में छपा. लेकिन कुछ ही देर बाद इसे डिलीट करवा दिया गया. लेकिन वेबसाइट से डिलीट करवाने के बाद भी अखबार में छपे आर्टिकल की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. जिसके बाद कल तक गुमनाम रहे जोरैन निजामानी पाकिस्तान के यूथ आइकॉन बन गए.

जोरैन निजामानी का आर्टिकल, जो डिलीट कराए जाने के बाद भी वायरल हो रहा है.

जोरैन निजामानी के आर्टिकल में लिखा था क्या?

जौरैन निजामानी के आर्टिकल में लिखा था- पाकिस्तान की सत्ता में बैठे बुर्जुग नेता और देश की युवा आबादी के बीच की खाईं बहुत बढ़ चुकी है. युवा अब नेताओं की बातों पर भरोसा नहीं करते. ज़ोरैन ने लिखा- देशभक्ति भाषणों से नहीं आती है. जब नौकरी, बराबरी के मौके और अच्छी सुविधाएं मिलती हैं, तो देशभक्ति अपने आप पैदा हो जाती है. पाकिस्तान में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, इसलिए युवा निराश हैं.

दरअसल जोरैन के इस आर्टिकल जेन-Z के मन की बात थी. उन्होंने यह लिखा था कि कैसे पाकिस्तान के Gen Z, सरकार और सेना के बहकावे में नहीं आ रहे हैं.

जोरैन ने लिखा था- देशभक्ति के विचारों को थोपने की कोशिशें फेल

जोरैन ने लिखा था- "युवा दिमाग, जेनरेशन जेड, ये सब कुछ जानते हैं कि क्या हो रहा है, और देशभक्ति के अपने विचारों को उन पर थोपने की आपकी लगातार कोशिशों के बावजूद, वे इसे भली-भांति समझ रहे हैं. इंटरनेट की बदौलत हमारे पास जो थोड़ी-बहुत शिक्षा बची है उसकी बदौलत, जनता को यथासंभव निरक्षर रखने की आपकी तमाम कोशिशों के बावजूद, आप असफल रहे हैं. आप लोगों को यह बताने में असफल रहे हैं कि उन्हें क्या सोचना चाहिए, वे खुद सोच रहे हैं. हो सकता है कि वे अपने मन की बात कहने से थोड़ा डरते हों क्योंकि वे सांस लेना ज्यादा पसंद करते हैं,"

जौरैन निजामानी हैं कौन?

डिलीट होने के बाद जब यह आर्टिकल वायरल हुआ तो जोरैन निजामानी चर्चा में आए. जोरैन लिटिल रॉक स्थित अर्कांसस विश्वविद्यालय में क्राइम साइंस में पीएचडी कर रहे है. पीएचडी की पढ़ाई के साथ-साथ ज़ोरैन निज़ामानी पेशे से एक वकील और प्रोफेसर भई हैं. जोरैन फेमस पाकिस्तानी टेलीविजन एक्टर फ़ाज़िला क़ाज़ी और क़ैसर खान निज़ामानी के बेटे हैं.

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जौरैन ने यूथ से की अपील- अच्छी किताबें पढे़ं

जोरैन अभी वो विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए अपने एक वीडियो में यह बताया कि मैं बहुत सारी किताबें पढ़ता हूं. इसी पढ़ाई का निचोड़ मैंने आर्टिकल में लिखा था. मुझे बहुत खुशी है कि इतने सारे लोगों ने मेरे लेख को पढ़ा. उन्होंने यूथ से अपील कि अच्छी किताबें पढ़े. ज्ञान हासिल करें.

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