- भारत के दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित अपने देश लौट आए, ईरान ने उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया
- भारत और ईरान सरकारें इस जंग के दौरान लगातार संपर्क में रहीं, पीएम मोदी और विदेश मंत्री ने बात की
- अमेरिका के वित्त मंत्री ने कहा कि फिलहाल होर्मुज से भारतीय, ईरानी और चीनी जहाज गुजरने पर कोई आपत्ति नहीं है
भारत के दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से अपने देश लौट आए. भारत से अपने संबंधों को देखते हुए ईरान ने इन्हें कोई नुकसान नहीं होने दिया. भारत और ईरान सरकार लगातार आपस में संपर्क में है. विदेश मंत्री एस जयशंकर से लेकर खुद पीएम मोदी की ईरानी नेतृत्व से कई बार इस जंग के दौरान बात हो चुकी है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से जब आज इस पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य से कुछ ईरानी, भारतीय और चीनी जहाजों के गुजरने से कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए कोई भी कार्रवाई ईरान युद्ध की अवधि पर निर्भर करेगी.
अमेरिकी वित्त मंत्री को सुनिए
बेसेंट ने सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "हम देख रहे हैं कि ईंधन ले जाने वाले जहाजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ईरानी जहाज पहले ही गुजर चुके हैं, और हमने बाकी दुनिया को आपूर्ति करने के लिए ऐसा होने दिया है. हमने भारतीय जहाजों को भी गुजरते देखा है... हमारा मानना है कि कुछ चीनी जहाज भी गुजर चुके हैं. खाड़ी में किसी भी प्रकार के नौसैनिक बेड़े या सुरक्षात्मक नौसेनाओं के आने से पहले ही इसकी तैयारी शुरू हो जानी चाहिए. इसलिए हमें लगता है कि ईरान की ओर से स्वाभाविक रूप से तेल की आपूर्ति में कमी आएगी और फिलहाल, हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है. हम चाहते हैं कि दुनिया को पर्याप्त आपूर्ति मिलती रहे."
जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप प्रशासन तेल भंडार जारी करने के अलावा युद्ध से होने वाली बढ़ती कीमतों और प्रभावों को कम करने के लिए कोई अन्य उपाय अपनाएगा, तो बेसेंट ने सीएनबीसी को बताया, "यह संघर्ष की अवधि पर निर्भर करेगा."
ट्रंप ने 7 देशों में की बात
एपी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजने की मांग की है, क्योंकि सोमवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमले जारी रहे. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व के कच्चे तेल पर अत्यधिक निर्भर देशों के साथ एक गठबंधन में शामिल होने के लिए बातचीत कर रहा है ताकि उस जलमार्ग की निगरानी की जा सके, जहां दुनिया के व्यापार किए गए तेल का लगभग पांचवां हिस्सा प्रवाहित होता है, लेकिन उन्होंने उन देशों के नाम बताने से इनकार कर दिया. इससे पहले ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल से ट्वीट कर अपील भी की थी कि चीन-जापान-ब्रिटेन आदि देश होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत भेजें, मगर किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया. अब ट्रंप सभी से फोन पर बात कर रहे हैं.
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