"हिंदुओं के खिलाफ टारगेटेड हिंसा...": बांग्लादेश संकट पर विवेक रामास्वामी

बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल अराजकता में तब्दील हो गई, वहीं 76 वर्षीय शेख हसीना हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर भारत चली गईं, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन तेज हो गया था.

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बांग्लादेश संकट पर दुनिया की नजर
नई दिल्ली:

बांग्लादेश की राजनीतिक उथल-पुथल दुनियाभर में सुर्खियां बटोर रही है. इस दौरान बांग्लादेश में जमकर हिंसा भी हुई. जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान चली गई. अब रिपब्लिकन की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे विवेक रामास्वामी ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हुए हमलों पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ टारगेटेड हिंसा गलत है, यह चिंताजनक है, और यह पीड़ित-आधारित कोटा प्रणालियों के लिए एक चेतावनी भी है.'

विवेक रामास्वामी बांग्लादेश संकट पर क्या बोले?

रामास्वामी ने कोटा प्रणाली का जिक्र करते हुए बताया कि इसे 1971 के युद्ध के बाद लागू किया गया था, जिसमें बांग्लादेश को पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिली थी. उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश ने 1971 में अपनी स्वतंत्रता के लिए खूनी जंग लड़ी. सैकड़ों हजारों बांग्लादेशी नागरिकों का रेप किया गया और उनकी हत्या कर दी गई थी. यह त्रासदी थी और इसका सही मायने में शोक मनाया गया मगर इसके बाद बांग्लादेश ने अपनी सिविल सेवा में नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली को लागू कर दिया. 80% नौकरियां स्पेसिफिक सोशल ग्रुप्स (वार-वेटरन, रेप पीड़ित, कम प्रतिनिधित्व वाले निवासियों आदि) को आवंटित की गईं.. केवल 20% योग्यता के आधार पर आवंटित की गईं.

कोटा सिस्टम पर भी रामास्वामी ने दी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल अराजकता में तब्दील हो गई, वहीं 76 वर्षीय शेख हसीना हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर भारत चली गईं, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन तेज हो गया था. बांग्लादेश में हुई हिंसा में तब तक कई लोगों की जान भी जा चुकी थी. इस बीच बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों पर भी हमले की खबरें आई. रामास्वामी ने दावा किया, "कोटा प्रणाली एक आपदा साबित हुई," उन्होंने 2018 के विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा किया, जिसके कारण बांग्लादेश ने अधिकांश कोटा को खत्म कर दिया, लेकिन 2024 में फिर से लागू किया गया.

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भारतीय मूल के नेता ने चेतावनी दी कि पिछली गलतियों को सुधारने के लिए डिज़ाइन की गई ऐसी प्रणालियां अनजाने में हिंसा के चक्र को जारी रख सकती हैं. उन्होंने कहा, "एक बार अराजकता शुरू हो जाने के बाद, इसे आसानी से नियंत्रित नहीं किया जा सकता. कट्टरपंथी अब हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं. 1971 में बलात्कार और हिंसा की गलतियों को सुधारने के लिए बनाया गया कोटा अब 2024 में रेप और हिंसा की ओर ले जा रहा है. खून-खराबा पीड़ित होने का अंतिम बिंदु है. बांग्लादेश को देखकर यह सोचना मुश्किल है कि हमें इससे क्या सबक सीखेंगे.

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