- अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस नवजात बेटे के साथ हेलीकॉप्टर से उतरते समय लड़खड़ा गईं
- चार सैनिक नजदीक मौजूद थे लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण उषा वेंस की मदद के लिए आगे नहीं बढ़े
- सीनियर IPS अधिकारी अरुण बोथरा ने प्रोटोकॉल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मुश्किल समय में मदद करना धर्म है
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस अभी अभी मां बनी हैं और उनका बेटा केवल 10 हफ्ते का है. सोमवार, 5 अक्टूबर को उषा वेंस अपने बेटे को हाथ में लिए हुए हेलीकॉप्टर से उतर रहीं थीं उसी समय वह लगभग लड़खड़ा गईं. कुछ पल के लिए लगा कि वह गिर जाएंगी. अमेरिका की सेकेंड लेडी मैरीलैंड के प्रिंस जॉर्ज काउंटी में जॉइंट बेस एंड्रयूज पर हेलीकॉप्टर से उतर रहीं थी तभी यह मंजर कैमरे में कैद हुआ. हालांकि हैरान करने वाली एक बात यह भी थी कि वहां चार सैनिक बेहद करीब खड़े थे लेकिन किसी ने इस नाजुक समय में उन्हें संभालने के लिए प्रोटोकॉल नहीं तोड़ा.
आखिर हुआ क्या था?
उस समय उषा वेंस ने 10 हफ्ते के बेटे एलेक नील वेंस को बेबी कैरियर में अपनी छाती से बांध रखा था. 40 साल की भारतीय मूल की उषा और वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस के चार बच्चे हैं. हाल ही में जन्म लेने वाला एलेक, 9 साल का बेटा इवान, 6 साल का बेटा विवेक और 4 साल की बेटी मिराबेल. हेलीकॉप्टर की सीढ़ियों पर उतरते समय उषा वेंस का पैर फिसलने ही वाला था, लेकिन उन्होंने तुरंत रेलिंग पकड़कर खुद को संभाला और एलेक को भी सुरक्षित रखा. उन्होंने रेलिंग की तरफ मुड़कर एक पल के लिए खुद को शांत किया और एलेक को चुप कराया, फिर पास खड़े सैन्य अफसर की ओर देखकर मुस्कुराईं.
- زوجة نائب الرئيس الأمريكي JD Vance بغت تطيح على وجهها و هي تشيل طفلها أبو شهرين . لاحظ و لا واحد من العسكر اللي حولها تحرك لو شعره 💀 https://t.co/RuN5Ca8mJx
— Abdullah (@Abdullahmusaad0) October 5, 2026
भारतीय अधिकारी ने उठाया प्रोटोकॉल पर सवाल
सीनियर IPS अधिकारी अरुण बोथरा ने उस प्रोटोकॉल पर ही सवाल उठाया है जो मुश्किल वक्त में भी आगे वाले की मदद करने की इजाजत नहीं देता.
वर्तमान में ओडिशा में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, CID क्राइम और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अरुण बोथरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस वीडियो पर रिप्लाई करते हुए लिखा, "मेरे एक सीनियर कहा करते थे कि नियम मायने रखते हैं. कानून मायने रखते हैं. प्रोटोकॉल मायने रखते हैं. लेकिन धर्म इन सबसे ऊपर है. जब दो महीने के बच्चे को गोद में लिए कोई महिला आपके सामने स्लिप हो जाती है, तो आप प्रोटोकॉल नहीं देखते. आप आगे बढ़ते हैं. आप मदद करते हैं. यही धर्म है."
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