US Supreme Court strikes Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पॉलिसी पर एक बड़ा अपडेट आया. यूएस सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन के दुनिया भर के देशों पर लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि नेशनल इमरजेंसी के लिए बनाए गए एक फेडरल कानून का सहारा लेकर इस तरह के बड़े व्यापारिक प्रतिबंध या टैरिफ नहीं थोपे जा सकते.
फेडरल कानून वो कानून होता है जिसे किसी देश की केंद्रीय सरकार बनाती है. यह कानून पूरे देश में लागू होता है, हर स्टेट और हर नागरिक पर एक जैसा लागू होता है.
क्या होगा इसका असर?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा सकता है. इस फैसले के बाद अब अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों, जिनमें भारत और चीन जैसे बड़े देश शामिल हैं, उन्हें बड़ी राहत मिल सकती है. साथ ही एक्सपर्ट का मानना है कि इस फैसले से ग्लोबल मार्केट में स्थिरता आएगी और ट्रेड वॉर की स्थिति पर रोक लग सकती है.
क्या ट्रंप सीधे फैसले को पलट सकते हैं?
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आखिरी होता है. ट्रंप किसी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए कोर्ट के फैसले को रद्द नहीं कर सकते. अगर वह ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो इसे असंवैधानिक माना जाएगा और अदालतों में उन्हें फिर से मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.
हालांकि, भले ही ट्रंप सीधे तौर पर कोर्ट को चुनौती ना दे सकें, लेकिन वे टैरिफ लगाने के लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन का संसद में बहुमत है, वो एक नया कानून पास करवा सकते हैं जो उन्हें ये टैरिफ लगाने की पावर दे दे.
पुराने कानूनों का सहारा
- कोर्ट ने 1977 के इमरजेंसी एक्ट (IEEPA) के इस्तेमाल को गलत बताया है. ट्रंप अब सेक्शन 301 नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट के नाम पर टैरिफ लगा सकते हैं. पहले यह स्टील, एल्यूमिनियम पर इस्तेमाल हो चुका है.
- सेक्शन 301, ट्रेड एक्ट 1974 के अनुसार अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का हवाला ट्रंप दे सकते हैं. यह सेक्शन पहले से चीन पर इस्तेमाल होते रहे हैं.
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