- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में कहा कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत आठ जंगें रोकवाई हैं.
- ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन के फोन का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने एक दिन में जंग रोकने का काम किया.
- भारत ने ट्रंप के मध्यस्थता दावों को हमेशा नकारते हुए सैन्य अधिकारियों की बातचीत को जंग रुकने का कारण बताया.
Trump Speech in Davos: स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग रुकवाने पर फिर बड़ा बयान दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने 8 जंग रुकवाई. इसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान जंग का भी जिक्र किया. ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के फोन का भी जिक्र किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- "मैंने भारत-पाकिस्तान की जंग रुकवा दी. अर्मेनिया, अजरबैजान की जंग रुकवाई, एक दिन में जंग रोकवा दी. व्लादिमीर पुतिन ने मुझे फोन कर कहा कि जो काम मैं 10 साल में नहीं कर पाया, वो काम आपने तुरंत कर दिया. आप यहां भी समझौता कराएं."
ट्रंप पहले भी कई बार कर चुके दावा, भारत हर बार नकार चुका
मालूम हो कि इससे पहले भी ट्रंप कई बार भारत-पाकिस्तान सहित दुनिया के कई जंग को रुकवाने का दावा कर चुके हैं. पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की लॉन्च किया था, तब दोनों देशों के बीच जंग जैसे हालात हो गए थे. इस हालात को तुरंत सामान्य करने का पहला दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ही ट्वीट करके दी थी.
हालांकि भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता के दावे को हर बार नकारा है. भारत का कहना है कि यह दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद रोका गया था.
ग्रीनलैंड, वेनेजुएला, नाटो सहित कई मुद्दों पर बोले ट्रंप
WEF में अपने भाषण की शुरुआत में ट्रम्प ने कहा- खूबसूरत दावोस वापस आकर अच्छा लग रहा है. यहां कई बिजनेस लीडर्स, कई दोस्त, कुछ दुश्मन और खास मेहमान मौजूद हैं. फिर उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप गलत दिशा में जा रहा है. दावोस में ट्रंप ने ग्रीनलैड, वेनेजुएला, नाटो सहित अन्य मुद्दों पर भी बात की.
अमेरिका के अलावा ग्रीनलैंड को कोई नहीं बचा सकताः ट्रंप
अमेरिका ने ग्रीनलैंड का जिक्र करते हुए कहा कि मैं ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों की बहुत इज्जत करता हूं. उन्होंने ग्रीनलैंड को खतरे में बताते हुए कहा कि अपनी सीमाओं को बचाना नाटो के हर देश का दायित्व है. लेकिन यह भी सच्चाई है कि अमेरिका के अलावा कोई भी ग्रीनलैंड को नहीं बचा सकता. चाहे कोई देश अकेला आए या फिर साथ मिलकर, वो ग्रीनलैंड को नहीं बचा पाएंगे. लोग जितना समझते हैं, हम उससे भी बड़ी ताकत हैं.
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