- US राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में अमेरिकी सेना की तेज और निर्णायक जीत का दावा किया है.
- ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है, साथ ही IRGC की कमान भी प्रभावित हुई है.
- ट्रंप ने बताया कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट की ऊर्जा पर निर्भर नहीं है, लेकिन क्षेत्र की सुरक्षा जारी रखेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्र के नाम अपने पहले बड़े टेलीविजन संबोधन में बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान में तेज़ और निर्णायक जीत हासिल कर ली है और युद्ध अब अंत की ओर बढ़ रहा है.
अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं. उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे प्रभावशाली और सटीक कार्रवाइयों में से एक बताया.
ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, उसकी वायुसेना खंडहर में तब्दील हो गई है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कमान को गंभीर क्षति पहुंची है. ट्रंप के मुताबिक, इन कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता को निर्णायक झटका लगा है.
उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन के कोर रणनीतिक उद्देश्य अब अंतिम चरण में हैं और अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में सक्रिय बना रहेगा.
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वेनेजुएला का जिक्र, ऊर्जा स्वतंत्रता पर जोर
अपने भाषण में ट्रंप ने वेनेजुएला का भी उल्लेख किया. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों की सराहना करते हुए कहा कि वहां कुछ ही मिनटों में एक तेज सैन्य अभियान को अंजाम दिया गया, जिसे उन्होंने “तेज, घातक और प्रभावी” बताया. ट्रंप ने दावा किया कि इस ऑपरेशन ने वैश्विक स्तर पर अमेरिका का सम्मान बढ़ाया है.
राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला के विशाल तेल और गैस संसाधनों के विकास और बिक्री को लेकर करीबी सहयोग कर रहा है, जिन्हें उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक बताया.
मिडिल ईस्ट पर निर्भरता खत्म होने का दावा
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की मदद के लिए क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखेगा.
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका शांति और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और मौजूदा सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
'होर्मुज की हमें जरूरत नहीं'
ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आक्रामक तेवर दिखाए हैं. लाइव संबोधन में ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की जरूरत नहीं है. साथ ही उन्होंने कुछ देशों को चेतावनी देते हुए उन्हें 'धोखेबाज' करार दिया और कहा कि ऐसे देशों को अब अमेरिका से ही तेल खरीदना चाहिए.
ट्रंप ने कहा, 'हमें होर्मुज की जरूरत नहीं थी और न ही आगे पड़ेगी.' उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग के रणनीतिक महत्व को कमतर बताते हुए कहा कि जैसे ही संघर्ष खत्म होगा, यह जलडमरूमध्य अपने आप खुल जाएगा.
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ईरान पर और तेज कार्रवाई का संकेत
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर सैन्य दबाव और बढ़ाएगा. उन्होंने कहा, 'हम अगले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़ा हमला करेंगे.' ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के तेल ढांचे (ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर) को भी निशाना बनाया जा सकता है. उनके मुताबिक, जरूरत पड़ने पर अमेरिका ईरान के तेल संसाधनों पर प्रहार कर सकता है.
कूटनीति भी जारी, पर्दे के पीछे बातचीत
हालांकि कड़े सैन्य रुख के साथ ट्रंप ने यह भी कहा कि कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत जारी है और अमेरिका अगला कदम सभी विकल्पों को देखते हुए उठाएगा. अपने संबोधन में ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका अब वैश्विक ऊर्जा जरूरतों के मामले में आत्मनिर्भर है और किसी भी रणनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है.













