- इजरायल ने पहली बार ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले किए
- एक तरफ ईरान, दूसरी तरफ कतर में फैले इस गैस फील्ड को दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार कहा जाता है
- इसके बाद ईरान ने सऊदी अरब, कतर और यूएई के तेल और गैस के ठिकानों पर हमला करने की धमकी दी है
मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नया और खतरनाक रूप लेती दिख रही है. दरअसल इजरायल ने बुधवार को ईरान के साउथ पार्स (South Pars) गैस फील्ड पर हमले किए. ये पहली बार है जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान में प्राकृतिक गैस के ठिकानों को निशाना बनाया है. इन हमलों से ईरान भड़क गया है और उसने सऊदी अरब, कतर और यूएई के तेल व गैस ठिकानों को सीधा निशाना बनाने की खुली धमकी दे दी है. ईरानी गैस फील्ड पर हमले के लिए कतर ने भी इजरायल की आलोचना की है. आइए बताते हैं साउथ पार्स इतना अहम क्यों है, और इस पर हमले को क्यों खतरनाक बताया जा रहा है.
ईरानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ - साउथ पार्स
साउथ पार्स ईरान के ऊर्जा उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है. इसे ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ माना जाता है. इससे पहले अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में ईरान के मुख्य तेल टर्मिनल खार्ग आइलैंड पर हमला किया था. तेल के बाद अब गैस फील्ड पर हमले को ईरान की इकोनमी की कमर तोड़ने की रणनीति माना जा रहा है. हालांकि इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं.
गैस का ये भंडार कितना अहम?
- साउथ पार्स और नॉर्थ फील्ड को दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड कहा जाता है. यह फारस की खाड़ी में एक तरफ ईरान (साउथ पार्स) तो दूसरी तरफ कतर (नॉर्थ फील्ड) से लगा हुआ है.
- माना जाता है कि दुनिया का लगभग 10-15 पर्सेंट गैस भंडार इसी इलाके में है. यहां से निकलने वाली गैस पर दुनिया के कई देश निर्भर हैं. उनके बिजली और अन्य उद्योगों के लिए ये बेहद अहम है.
- इस गैस फील्ड की खोज 1990 में की गई थी. यह करीब 9700 वर्ग किमी इलाके में फैला है. इसका 3700 वर्ग किमी (साउथ पार्स) हिस्सा ईरान में और 6 हजार वर्ग किमी (नॉर्थ फील्ड) कतर के इलाके में है.
- रॉयटर्स के मुताबिक, इस पूरे इलाके में 1800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस के भंडार हैं. ये कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इससे पूरी दुनिया की 13 साल तक ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकती हैं या 35 साल तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है.
- कतर इसी गैस फील्ड की बदौलत लिक्विड नेचुरल गैस (एलएनजी) का सबसे बड़ा सप्लायर बना है. उसने अपने इलाके से गैस निकालने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी लगा रखा है.
- ईरान भी लगभग 700 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस रोजाना यहां से निकालता है. ये देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए काफी अहम है. अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों की वजह से वह इसका निर्यात नहीं कर पाता है.
हमले के बाद ईरान गैस भंडार से उठी लपटें
ईरान के सरकारी मीडिया ने विशाल ऑफशोर साउथ पार्स नेचुरल गैस फील्ड पर हमले की पुष्टि की है. ईरान के सरकारी टीवी और न्यूज एजेंसी इरना ने बताया कि ये हमले ईरान के दक्षिणी बुशहर प्रांत के असालुयेह (Asaluyeh) में स्थित गैस फैसिलिटीज को निशाना बनाकर किए गए हैं. इन हमलों में कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है. हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में आग की लपटें और धुएं के बड़े गुबार उठते नजर आ रहे हैं.
ईरान ने दी खाड़ी देशों को धमकी
इस हमले के बाद ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा भंडारों को निशाना बनाने की धमकी दे दी है. ईरानी मिलिट्री के ऑपरेशनल कमांडर खातम अल अनबिया ने एक बयान में कहा है कि अगले कुछ घंटों में वह सऊदी अरब, कतर और यूएई के तेल व गैस के ठिकानों पर हमला करेगा. ईरान ने खासतौर से सऊदी अरब की सामरेफ रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को उड़ाने की धमकी दी है. यूएई के अल हसन गैस फील्ड और कतर के कई पेट्रोकेमिकल प्लांट और रिफाइनरियों को भी अपनी हिट लिस्ट में बताया है.
कतर ने की इजरायल की निंदा
साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले की कतर ने भी कड़ी निंदा की है और इसके लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने इस हमले को बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और कहा कि ऊर्जा भंडार पर हमले दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं बल्कि लोगों, क्षेत्रों और पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा है. उन्होंने कहा कि हम बार-बार कहते रहे हैं कि महत्वपूर्ण फैसिलिटीज पर हमले से बचना चाहिए. हम सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की अपील करते हैं.
कच्चे तेल के दाम में लगने लगी आग
ईरान के गैस भंडार पर हमले और उसके बाद ईरानी धमकी का असर कच्चे तेल के दामों पर तुरंत दिखाई देने लगा है. बुधवार को ही ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 4 पर्सेंट से ज्यादा बढ़ गईं. ब्रेंट फ्यूचर जो 107.95 डॉलर प्रति बैरल पर था, बुधवार को 4.4 पर्सेंट (4.53 डॉलर) बढ़कर 108.60 डॉलर प्रति बैरल हो गया. जानकारों का कहना है कि अगर हमले तेज हुए तो तेल और गैस के दाम और भी चढ़ सकते हैं.













