- पाकिस्तान के नागरिक ईरान में मिसाइल हमलों के कारण भारी सामान लेकर सीमा पार कर भाग रहे हैं
- ईरान के मिर्जावेह और पाकिस्तान के तफ्तान सीमा चौकी पर लोगों का लगातार आना-जाना जारी है
- तेहरान में धमाकों के बाद कई देशों के दूतावासों ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है
पाकिस्तान के नागरिक पड़ोसी देश ईरान से अपना-अपना सूटकेस लेकर भागकर सीमा पार करते हुए आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि वहां मिसाइलें दागी जा रही थीं और यात्रा में बहुत अफरा-तफरी थी. इसलिए वे जल्दी-जल्दी देश छोड़कर निकलने की कोशिश कर रहे थे. यह सब उस समय हो रहा है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अपने हमले शुरू कर दिए. अचानक से पाकिस्तान से लगे ईरान के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले पाकिस्तानियों के लिए ईरान पाकिस्तान से भी खतरनाक जमीन बन गया.
न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार उसके पत्रकारों ने देखा कि ईरान के मिर्जावेह और पाकिस्तान के पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत के तफ्तान के बीच स्थित सीमा चौकी पर लोगों का लगातार आना-जाना लगा हुआ था. लोग बड़े लोहे के गेट से होकर सीमा पार कर रहे थे. शनिवार से ईरान की राजधानी तेहरान में जोरदार धमाके हो रहे हैं, और दुनिया के कई देशों के दूतावासों ने अपने नागरिकों से देश छोड़ने को कहा है.
तफ्तान की यह अलग-थलग सीमा बलूचिस्तान की राजधानी और सबसे बड़े शहर क्वेटा से लगभग 500 किलोमीटर दूर है. AFP के पत्रकारों ने देखा कि ईरान का झंडा आधा झुका हुआ था और सैनिक पहरा दे रहे थे. ज्यादातर लोग अपने भारी-भरकम सामान को पैदल सीमा पार ले जा रहे थे, जबकि माल ढोने वाले ट्रक लंबी कतार में खड़े थे.
49 साल के यात्री इरशाद अहमद ने AFP को बताया कि वह तेहरान के एक हॉस्टल में ठहरे हुए थे, जब उन्होंने पास में मिसाइलें दागी जाती देखीं. उन्होंने कहा, “हॉस्टल के पास एक सेना का अड्डा था और हमने कई मिसाइलें दागते हुए देखीं.” उन्होंने आगे कहा, “उसके बाद हम पाकिस्तानी दूतावास गए ताकि वे हमें वहां से निकाल सकें. उन्होंने हमें सुरक्षित यहां पहुंचा दिया.”
ईरान पर हुए हमले पर पाकिस्तान सरकार का स्टैंड
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानून का “उल्लंघन” है. शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्वीटर) पर लिखा, “यह बहुत पुरानी परंपरा है कि किसी देश के प्रमुख (राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख) को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.”
उन्होंने यह भी कहा कि “पाकिस्तान की जनता इस दुख और शोक की घड़ी में ईरान की जनता के साथ खड़ी है और खामेनेई की शहादत पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है.”
तेहरान में पाकिस्तानी दूतावास के एक शिक्षक ने अपना नाम साकिब बताया. उन्होंने AFP से कहा, “हमारे निकलने से पहले स्थिति सामान्य थी. हालात इतने खराब नहीं थे.” 38 साल के साकिब ने कहा कि शनिवार को तेहरान पर हुए हमलों ने “हमें शहर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया.” उन्होंने कहा कि शनिवार रात को स्थिति खराब हो गई और हमलों में कई कीमती जानें चली गईं.













