- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नाकेबंदी जारी रखी है, जिससे विश्व की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है
- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत 22 देशों ने बयान जारी कर होर्मुज में तेल और गैस टैंकरों की नाकेबंदी की निंदा की
- ब्रिटेन ने अपनी परमाणु पनडुब्बी अरब सागर भेजी है, जिससे ईरान के लिए सैन्य दबाव बढ़ सकता है
US Israel War Against Iran: ईरान ने साफ कर दिया है कि हमारे ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया तो दोबारा कतर पर हमले जैसा पलटवार होगा. यानि ईरान भी चढ़ा बैठा है. कुल मिलाकर ईरान ने होर्मुज की घेराबंदी करके समूची दुनिया की नस दबा रखी है. वही नस सारी दुनिया को परेशान कर रही है. अमेरिका उस नस को जितना खोलने की कोशिश करता है, उतना ही गहरा फंस जा रहा है. लेकिन अब होर्मुज संकट से निकलने के लिए 22 देशों ने साझा बयान जारी किया है. ताकि होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाया जा सके. इसे आप इस तरह से मान सकते हैं कि अब होर्मुज की जंग में ईरान वर्सेज 22 देश हो गया है. सवाला है कि इसके क्या मायने हैं और इसका क्या असर हो सकता है. चलिए समझने की कोशिश करते हैं.
होर्मुज नाकेबंदी पर ईरान के खिलाफ साथ आए 22 देश
होर्मुज एक संकरा जलमार्ग है और खाड़ी में प्रवेश का रास्ता है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने इसकी नाकेबंदी कर रखी है. समंदर में सिर्फ 3 किलोमीटर का संकरा सा रास्ता सारे जमाने का जंजाल बन गया है. इस तीन किलोमीटर के हिस्से ने सारी दुनिया को बेचैन करके रख दिया है. ईरान की नाकेबंदी के आगे यहां तेल और गैस के टैंकर्स अटके पड़े हैं और इनके अटकने का साफ मतलब है दुनिया के तमाम देशों में जनजीवन का अटक जाना. ऐसे में अब होर्मुज को खुलवाने के लिए ब्रिट्रेन फ्रांस और जर्मनी समेत कुल 22 देशों ने साझा बयान जारी कर होर्मुज में तेल और गैस के टैंकरों को रोके जाने की निंदा की है.
ये 22 देश कौन से हैं?
इसमें संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, कोरिया गणराज्य, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन, लिथुआनिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं.
इनके अलावा अमेरिका और इजरायल पहले से ही होर्मुज पर ईरान के खिलाफ बारूद उगल रहे हैं. तो एक तरह से कुल मिलाकर 24 देश अब होर्मुज पर ईरान के खिलाफ लामबंद हो गए हैं. अब जानिए कि आखिर 22 देशों ने जो बयान वाली चेतावनी जारी की है, उसमें क्या लिखा है?
बयान में क्या लिखा है?
बयान में इन देशों ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल पोतों और पश्चिम एशिया में तेल और गैस परिवहन सहित नागरिक दुनिया के ढांचे पर हमलों की निंदा की है. इन देशों ने बढ़ते संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए ईरान से कहा कि वह बाधित सुरंगों, ड्रोन और मिसाइल हमलों से कमर्शियल जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की हरकत तुरंत रोक दे और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2817 का पालन करे
दरअसल यह नियम कहता है कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही की आजादी एक बुनियादी अधिकार है और इसपर किसी भी तरह की नाकेबंदी बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए. ये बयान ऐसे में समय में आया है जब ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट का उपयोग करने वाले देशों को साथ आने के लिए कहा था. उन्होंने कहा था कि जापान से लेकर चीन और नाटो देशों को होर्मुज पर उनकी मदद करनी चाहिए. उन्होंने कहा था, "जहां तक होर्मजु स्ट्रेट की बात है, हम (अमेरिका) बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. लेकिन अच्छा होता कि वे देश, जिनमें चीन भी शामिल है, वे देश जो इसका उपयोग करते हैं, अगर ये देश इसमें शामिल हों, तो यह अच्छा होगा. चीन अपनी 90% ऊर्जा इसके जरिए पाता है. जापान अपनी 95% ऊर्जा इसके जरिए पाता है."
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क्या ईरान मान जाएगा?
लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि क्या ईरान मान जाएगा, क्योंकि वो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है जिसमें अभी तक होर्मुज स्ट्रेट की उसकी सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है. ईरान होर्मुज स्ट्रेट के दम पर ही सारी दूनिया पर दबाव बना रहा है कि वो अमेरिका और इजरायल को रोके, वरना होर्मुज में उसके बारूदी जाल को भेदकर आगे बढ़ना आसान नहीं होगा. शारजाह में उसने एक जहाज पर हमला करके अपने भीषण इरादों का ट्रेलर दिखाने की कोशिश की है. वो लगातार कर रहा है कि होर्मुज में आक्रमण का रास्ता आत्मघाती और मूर्खतापूर्ण है.
ईरानी सेना के हेडक्वाटर, खातम अल-अंबिया के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम जोल्फगारी ने कहा कि इस युद्ध में, हम अपने देश और राष्ट्र के लिए एक स्थायी सुरक्षा दृष्टिकोण की तलाश कर रहे हैं. आप भी एक रास्ता खोज रहे हैं क्योंकि आपका आक्रमण शुरुआत से ही मूर्खतापूर्ण और आत्मघाती कदम था. ईरान आज केवल अपनी रक्षा के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र और मुसलमानों की सुरक्षा के लिए भी लड़ रहा है. ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी महानता को अपना रहा है. हमारा ध्यान अपनी भूमि और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है, और जैसे आप हमारे साथ सलूक कर रहे हैं हम भी उसी अंदाज में आपको जवाब दे रहे हैं.
लेकिन ईरान के लिए आगे मुश्किल बढ़ सकती है...
लेकिन होर्मुज पर जो कुछ अब होने वाला है, वो बहुत आसान तो नहीं दिख रहा है. अबतक ईरान पर हमले के लिए अपने सैन्य अड्डे का उपयोग करने से मना करने वाला ब्रिटेन अब अपने अड्डे के इस्तेमाल की इजाजत दे रहा है तो दूसरी तरफ है ब्रिटेन ने अपनी हाइटेक और घातक परमाणु पनडुब्बी को भी ऑस्ट्रेलिया से अरब सागर में भेज दिया है. ये सामान्य घटना नहीं है. ये पनडुब्बी अपने आप में चलता फिरता सैन्य किला है. जिसकी एक एक खूबी ईरान के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है.
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