ट्रंप ने कहा था- अनंतकाल तक युद्ध के लिए हैं हथियार, ये पूरा सच नहीं था

US Iran War: ईरान के खिलाफ हथियारों के तेजी से खर्च होने से भविष्य में अमेरिका की रक्षा क्षमता कमजोर हो सकती है, खासकर अगर उसे प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन के साथ लंबे समय तक संघर्ष करना पड़े. समझिए कैसे.

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US Iran War: अमेरिका या ईरान, किसके पास महीनों की जंग के लिए हथियार
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  • अमेरिका ने जंग के पहले 4 दिनों में ईरान के लगभग 2000 ठिकानों पर बमबारी की, जो तेज और बड़े पैमाने पर हो रही है
  • अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइलें और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें तेजी से खत्म हो रही हैं
  • ईरान ने कुछ उन्नत रडार सिस्टम पर सफल हमले किए हैं जिससे अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम प्रभावित हो सकता है
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मिडिल ईस्ट में जंग जारी है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की जा रही बमबारी बहुत तेज और बड़े पैमाने पर हो रही है. अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) के अनुसार, युद्ध के पहले चार दिनों में ही अमेरिका ने ईरान के लगभग 2,000 ठिकानों पर हमला किया. इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि उनकी सेना के पास हथियारों का इतना बड़ा भंडार है कि वह यह युद्ध “हमेशा” तक चला सकती है. लेकिन यह दावा कितना सही है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण हथियार, खासकर अमेरिका में बने इंटरसेप्टर मिसाइलें आने वाले हफ्तों में कम पड़ सकती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिका लंबे समय तक युद्ध जारी रख सकता है.

यह सवाल CNN के पत्रकार फरीद जकारिया ने अपने शो में द इकोनॉमिस्ट के डिफेंस एडिटर शशांक जोशी के सामने उठाया.

सवाल- क्या ट्रंप सही कह रहे हैं कि अमेरिका के पास इतने बड़े हथियार भंडार हैं कि वे कई हफ्तों या महीनों तक युद्ध चला सकते हैं?

शशांक जोशी- यह सच है कि अमेरिका के पास बहुत बड़े हथियार भंडार हैं, लेकिन वह बहुत तेजी से उनका इस्तेमाल भी कर रहा है. कुछ प्रकार के हथियार, जैसे कम दूरी वाले GPS-guided बम, अभी काफी मात्रा में उपलब्ध हैं. लेकिन दूसरी तरह के हथियारों की स्थिति अलग है. यहां खास तौर पर दो तरह के हथियारों का जिक्र जरूरी है. पहली लंबी दूरी से हमला करने वाली मिसाइलें, जैसे टॉमहॉक लैंड-अटैक मिसाइल और दूसरी एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें.

इन दोनों का इनका इस्तेमाल युद्ध के शुरुआती दिनों में बहुत तेजी से हुआ है. इसलिए इनका भंडार असीमित नहीं है और सीमित है. अगर इसी गति से इनका इस्तेमाल होता रहा तो कुछ हफ्तों में समस्या पैदा हो सकती है, भले ही बाद में युद्ध की स्थिति बदल जाए. मेरी चिंता यह नहीं है कि अमेरिका के हथियार तुरंत खत्म हो जाएंगे.

असली चिंता यह है कि इन हथियारों के तेजी से खर्च होने से भविष्य में अमेरिका की रक्षा क्षमता कमजोर हो सकती है, खासकर अगर उसे प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन के साथ लंबे समय तक संघर्ष करना पड़े. चीन भी इस स्थिति को समझेगा और इससे भविष्य में शक्ति संतुलन और डराने-धमकाने की रणनीति (deterrence) पर असर पड़ सकता है.

सवाल- खाड़ी देशों और अमेरिका के पास जो एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें हैं, क्या वे भी कम पड़ रही हैं? 

शशांक जोशी- यह चिंता सही है. दो बड़ी समस्याएं हैं. पहली, बहुत उन्नत रडार सिस्टम, जो एयर डिफेंस सिस्टम को चलाने के लिए बेहद जरूरी होते हैं, जैसे पैट्रियट और THAAD (टर्मिनल हाई-एल्टीट्यूड एयर डिफेंस). सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान ने कुछ शुरुआती चेतावनी देने वाले रडार सिस्टम पर सफल हमले किए हैं. इससे पूरा एयर डिफेंस सिस्टम कुछ समय के लिए बेकार हो सकता है. दूसरी समस्या यह है कि भले ही अधिकांश एयर डिफेंस सिस्टम अभी भी काम कर रहे हों, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले इंटरसेप्टर बहुत तेजी से खत्म हो रहे हैं.

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यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की ने कहा था कि कुछ ही दिनों में खाड़ी देशों और अमेरिका ने जितने पैट्रियट इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए, उतने यूक्रेन को पूरे युद्ध में अब तक नहीं मिले. इन मिसाइलों का सालाना उत्पादन बहुत कम है, हालांकि अमेरिकी सरकार इसे बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इन्हें जल्दी से दोबारा बनाना या उपलब्ध कराना आसान नहीं है. इसके अलावा इनकी मांग कई जगहों पर है, जैसे यूक्रेन और एशिया में तैनात अमेरिकी सेना. इसलिए पूरी तरह खत्म होने की बजाय संभव है कि इनका इस्तेमाल सीमित करना पड़े.

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सवाल- क्या ईरान के पास भी ड्रोन और मिसाइलें कम हो रही हैं?

शशांक जोशी- अभी ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है. ईरान के पास मिसाइलों का बड़ा भंडार है. सही संख्या तो पता नहीं है, लेकिन अधिकारियों का अनुमान है कि उनके पास 2,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं. ड्रोन की संख्या इससे कई गुना ज्यादा हो सकती है. इनमें सबसे प्रसिद्ध शाहेद-136 ड्रोन है, जिसे एक साधारण लेकिन प्रभावी हमला करने वाला ड्रोन माना जाता है. रूस भी इन्हें यूक्रेन के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा है. हालांकि अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के ड्रोन लॉन्च करने वाले ठिकानों, भंडार और उत्पादन केंद्रों पर हवाई हमले कर रहे हैं. अमेरिकी सेना के संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने कहा कि हाल के दिनों में ईरान द्वारा ड्रोन लॉन्च करने की दर 70 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गई है.

इसका मतलब है कि भले ही ईरान के पास ड्रोन का भंडार काफी हो, लेकिन उन्हें लॉन्च करना और हवा में भेजना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि उनके ठिकानों का पता लगाकर उन पर हमला किया जा रहा है.

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(इनपुट- सीएनएन)

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