पाकिस्तान में अमेरिका के साथ बात करके क्यों पछता रहा ईरान?

US Iran War News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध खत्म करने का दबाव उनपर नहीं, ईरान पर है. "ईरान के लिए वक्त तेजी से बीत रहा है."

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US Iran War: अमेरिका के साथ पाकिस्तान में बात करके क्यों पछता रहा ईरान
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  • ईरानी संसद की नेशनल सिक्योरिटी समिति के सदस्य नबावियन ने पाकिस्तान में अमेरिका से बातचीत को रणनीतिक गलती माना
  • नबावियन ने कहा कि परमाणु मुद्दे को पाकिस्तान में बातचीत के दौरान उठाना दुश्मन की हिम्मत बढ़ाने जैसा था
  • अमेरिका ने ईरान से 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम हटाने और इसे 20 साल तक ब्लॉक रखने की मांग की थी- नबावियन
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US Iran War: ईरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ बात करके को अपनी सबसे बड़ी गलती मानने लगा है. उसे ऐसा लगता है कि अमेरिका के साथ बात ही नहीं करनी चाहिए थी. दरअसल ईरान की संसद की नेशनल सिक्योरिटी और विदेश नीति समिति के सदस्य महमूद नबावियन ने कहा है कि पाकिस्तान में अमेरिका के साथ हुई बातचीत एक गलती थी. नबावियन ने अपने इंटरव्यू का एक हिस्सा पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर बात करना एक “रणनीतिक गलती” थी. उन्होंने X पर लिखा, “पाकिस्तान में बातचीत के दौरान परमाणु मुद्दे को टेबल पर रखना एक रणनीतिक गलती थी.”

ईरान इंटरनेशनल के अनुसार नबावियन ने कहा, “पाकिस्तान में हुई बातचीत में हमने रणनीतिक गलती की. हमें परमाणु मुद्दे को बातचीत के लिए नहीं रखना चाहिए था.” उन्होंने आगे कहा, “ऐसा करने से दुश्मन और ज्यादा हिम्मती हो गया.” नबावियन ने बताया कि अमेरिका ने मांग की थी कि ईरान के 60% तक समृद्ध किए गए परमाणु सामग्री (एनरिच्ड यूरेनियम) को हटा दिया जाए और 20 साल तक ब्लॉक रखा जाए. उन्होंने कहा कि तेहरान ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया.

मेरे पास बहुत समय है, लेकिन ईरान के पास नहीं- ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि उन पर युद्ध खत्म करने का ज्यादा दबाव नहीं है. उन्होंने कहा कि समझौता तभी होगा जब वह अमेरिका के लिए अच्छा होगा. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “ईरान के बारे में यह जान लें कि इस स्थिति में मैं शायद सबसे कम दबाव में रहने वाला व्यक्ति हूं. मेरे पास बहुत समय है, लेकिन ईरान के पास नहीं है- समय तेजी से निकल रहा है!”

उन्होंने आगे कहा, “ईरान की नौसेना समुद्र के नीचे पड़ी है, उनकी वायु सेना नष्ट हो चुकी है, उनके एंटी-एयरक्राफ्ट और रडार हथियार खत्म हो गए हैं, उनके नेता अब हमारे बीच नहीं हैं, नाकाबंदी बहुत मजबूत और पूरी तरह लागू है और आगे हालात और खराब होंगे- समय उनके पक्ष में नहीं है! समझौता तभी होगा जब वह अमेरिका, हमारे सहयोगियों और पूरी दुनिया के लिए सही और अच्छा होगा.”

पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को कैपिटल हिल में हुई सुनवाई के दौरान कैबिनेट के अधिकारियों ने यह बताने से बचा कि ऊर्जा की कीमतें कब कम होंगी. कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने चुपचाप कहा कि इस संघर्ष के 60 दिन पूरे होना उनके समर्थन के लिए एक अहम मोड़ हो सकता है.

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