- भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है
- कमर्शियल जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं- भारत
- खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए भारत ने बातचीत और कूटनीति के जरिए स्थिरता बनाए रखने की अपील की है
US Iran War and Attacks in Strait of Hormuz: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग पर हुए हमलों की निंदा की और फ्री नेविगेशन को फिर से शुरू करने की मांग की है. होर्मुज स्ट्रेट भारत ही नहीं पूरी दुनिया में ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है. भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने मंगलवार, 28 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया, “कमर्शियल शिपिंग को मिलिट्री हमलों का टारगेट नहीं बनाया जाना चाहिए, और ऐसी कोशिशें बहुत बुरी हैं.”
पटेल ने किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन ईरान की तरफ इशारा करते हुए याद दिलाया कि भारत ने बहरीन के लाए गए काउंसिल के एक प्रस्ताव को को-स्पॉन्सर किया था, जिसमें मिडिल ईस्ट पड़ोसियों पर तेहरान के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी. उन्होंने कहा, “इस मामले में यह बताना जरूरी है कि भारत ने यूएनएससी प्रस्ताव 2817 को को-स्पॉन्सर किया था, जिसे 11 मार्च को अपनाया गया था.”
उन्होंने कहा कि स्ट्रेट के रास्ते से बिना किसी रोक-टोक वाली शिपिंग बेहद जरूरी है. यह भारत के लिए एक अहम कनेक्टिविटी का रास्ता है. यहां से भारत की व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला भौगोलिक रूप से जुड़ी हुई हैं. इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है. उन्होंने कहा, “लगभग 10 मिलियन भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहते और काम करते हैं; उनकी सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सबसे जरूरी है.”
खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति की अपील करते हुए, उन्होंने कहा, “मिडिल ईस्ट हमारा सबसे करीबी पड़ोस है और इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में हमारा बहुत बड़ा हिस्सा है.”
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