ईरान में सेना उतारना ट्रंप की सबसे बड़ी गलती होगी? NDTV से ईरानी प्रोफेसर बोले- जमीन पर आसानी से गोली मारेंगे

US Israel War against Iran: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पेंटागन अपने प्रतिष्ठित 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को मिडिल ईस्ट में भेजने की योजना बना रहा है. ट्रंप एक तरफ बातचीत करने का दावा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ सैन्य तैनाती बढ़ाने की तैयारी है.

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US Iran War: ईरानी विद्वान, प्रोफेसर फुआद इजादी ने NDTV से खास बात की
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  • अमेरिका- ईरान की जंग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है- एक तरह बातचीत दो दूसरी ओर सैन्य तैनाती की तैयारी
  • ईरानी विद्वान फुआद इजादी ने जमीन पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को ईरान के लिए फायदे का सौदा बताया
  • ईरान ने युद्ध में इस्तेमाल की गई सैन्य तकनीकें देश में ही विकसित की हैं और विदेशी निर्भरता कम है- फुआद इजादी
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US Israel War against Iran: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग एक अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति बातचीत के जरिए जल्द सीजफायर का संकेत दे रहे हैं तो दूसरी तरफ रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका मिडिल ईस्ट में हजारों सैनिक तैनात करने की तैयारी कर रहा है. पता नहीं कि जंग आगे क्या रुख लेगी. हालांकि ईरान की जमीन पर अमेरिकी सेना उतारने की खबरों पर ईरानी विद्वान, प्रोफेसर फुआद इजादी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और चेतावनी दी कि ऐसा कदम तेहरान में बैठे सैन्य कमांडरों का रास आएगा. उन्होंने NDTV से खास बातचीत में कहा, “ईरानी जनरल वास्तव में इसका स्वागत करेंगे, क्योंकि जमीन पर मौजूद सैनिकों को निशाना बनाना F-35 लड़ाकू विमानों को मारने से आसान है. इसलिए आप कई अमेरिकियों को मरा हुआ देखेंगे.”

उन्होंने यह भी कहा कि दूर से रहकर नागरिक इलाकों पर मिसाइल हमले करना “बहुत मुश्किल काम नहीं है”, लेकिन “असल में जमीन पर लड़ाई लड़ना, मुझे नहीं लगता कि अमेरिकी यह संभाल पाएंगे.”

उनकी यह टिप्पणी उस समय आई जब दो अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि पेंटागन उत्तरी कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग से प्रतिष्ठित 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिकों को मिडिल ईस्ट में भेजने की योजना बना रहा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट है कि अमेरिका इस डिवीजन से 3000 सैनिकों को भेजने को तैयार है. इससे अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और बढ़ेगी.

ट्रंप के शांति वाली कोशिश पर ईरान को संदेह- फुआद

इस सप्ताह कूटनीतिक प्रयास तेज होते दिखाई दिए. ऐसी अटकलें बढ़ रही हैं कि पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, क्योंकि उसके प्रधानमंत्री ने बातचीत कराने में मदद की पेशकश की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच “उपयोगी” बातचीत हुई है. हालांकि तेहरान ने इस दावे को तुरंत “फेक न्यूज” कहकर खारिज कर दिया. ऐसे में इजादी ने तर्क दिया कि ईरान वॉशिंगटन के प्रस्तावों को लेकर संदेह में है, क्योंकि पहले भी बातचीत के प्रस्तावों के बाद हिंसा हुई है. 

इजादी ने कहा, “उन्होंने कल हुई बातचीत के बाद कई बार हमला किया. इसलिए कोई भी इस तरह की बयानबाजी के जाल में नहीं फंसेगा... बातचीत के बीच ईरान पर दो बार हमला किया गया.”

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इजादी ने बताया कि संघर्ष के किसी भी समाधान के लिए ईरान की तीन मुख्य मांगें हैं. पहली, अमेरिका को नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करने होंगे. दूसरी, ईरान को भरोसेमंद आश्वासन चाहिए कि ऐसे हमले दोबारा नहीं होंगे. उन्होंने कहा, “आप ऐसा देश नहीं चला सकते जिस पर हर कुछ महीनों में दो परमाणु शक्तियाँ हमला करती रहें.” तीसरी मांग यह है कि अमेरिका और इजरायल युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करें.

ईरान के आप इतनी सैन्य ताकत कैसे आई?

ईरान की सैन्य क्षमताओं पर बात करते हुए इजादी ने जोर देकर कहा कि युद्ध में इस्तेमाल किए गए सिस्टम देश में ही विकसित किए गए हैं. उन्होंने कहा, “हमने ये चीजें दूसरे देशों से नहीं खरीदी हैं. 1979 की क्रांति के बाद से ईरान ने विज्ञान और इंजीनियरिंग में निवेश किया है.”

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वॉशिंगटन की मंशा पर शक जताते हुए उन्होंने ट्रंप को अनिश्चित और “नेतन्याहू के प्रभाव में” बताया. इस संघर्ष को “असफल युद्ध” बताते हुए इजादी ने भविष्यवाणी की कि जब अमेरिका अपनी विफलता को पहचान लेगा, तब ट्रंप जीत की घोषणा कर देंगे और फिर “ग्रीनलैंड या कनाडा पर कब्जा करने निकल पड़ेंगे.”

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