US Iran War and Oil Crisis: ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के छेड़े युद्ध ने पूरे दुनिया में तेल संकट ला दिया है और अमेरिका की जनता भी इससे अछूती नहीं है. इस्लामाबाद में वार्ता फेल हो जाने और अमेरिका की तरफ से होर्मुज की नाकेबंदी के ऐलान के बाद तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल आया है और यह प्रति बैरल 100 डॉलर के आंकड़े के पार पहुंच चुका है. ऐसे में ईरान अमेरिकी लोगों के दुखती रग पर ऊंगली रख रहा है. इस्लामाबाद वार्त में ईरान का नेतृत्व करने वाले ईरान की संसद के स्पीकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट डालकर पेट्रोल की कीमतों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाया है.
ईरानी स्पीकर का तंज
मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने X पर एक तस्वीर के साथ पोस्ट किया, जिसमें व्हाइट हाउस के आसपास मौजूद पेट्रोल पंप की कीमतें दिख रही थीं. उन्होंने लिखा, “अभी की कीमतों का आनंद लो. इस तथाकथित नाकेबंदी के बाद, जल्द ही तुम्हें 4–5 डॉलर वाली गैस याद आएगी.” उनके कहने का मतलब था कि अमेरिका में प्रति गैलन गैस के लिए 4–5 डॉलर वाली कीमत जल्द ही अतीत की बात हो जाएगी. वापस यह कीमत नहीं आएगा. बता दें कि 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले, अमेरिका में गैस का औसत मूल्य लगभग 2.98 डॉलर प्रति गैलन था.
होर्मुज की नाकेबंदी करेगी अमेरिकी सेना
ईरान के बाद अब अमेरिका भी होर्मुज की नाकेबंदी करेगा. रविवार को अमेरिकी सेना ने कहा कि वह सोमवार को 1400 GMT (भारतीय समयानुसार शाम के 7.30 बजे) पर ईरान के सभी खाड़ी बंदरगाहों की नाकेबंदी करेगी. इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही पर नियंत्रण हो जाएगा. यह जलमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा इसी से गुजरता है.
इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने नाकेबंदी का ऐलान किया था और धमकी दी थी कि इससे “सभी जहाज” प्रभावित होंगे. इस बीच, शांति वार्ता विफल होने और ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक करने के आदेश के बाद तेल की कीमतें फिर से बढ़ गईं. सोमवार को ट्रेडिंग शुरू होते ही वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) तेल की कीमत लगभग 8 प्रतिशत बढ़कर 104.50 डॉलर प्रति बैरल हो गई. वहीं जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट तेल की कीमत 7 प्रतिशत बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई.














