- अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश ईरान के करीब पहुंचने के लिए लंबा रास्ता अपना रहा है
- यह युद्धपोत अफ्रीका के दक्षिणी छोर से होकर केप ऑफ गुड होप के रास्ते हिंद महासागर में प्रवेश करेगा
- ऐसा लगता है कि लाल सागर में हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण अमेरिका ने अपनी रणनीति बदली है
US Iran War and Houthi-threatened Red Sea: समुद्र में दुनिया की सबसे ताकतवर जंगी जहजों में से एक, अमेरिका का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश, सीधा रास्ता छोड़कर लंबा चक्कर लगा रहा है. वह डेढ़ गुना लंबा रास्ता लेकर ईरान के करीब पहुंच रहा है. वजह? डर और खतरा. लाल सागर में बढ़ते हमले और तनाव ने अमेरिका को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. अब यह जहाज अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाकर मिडिल ईस्ट में जा रहा है. आखिर ऐसा क्या खतरा है कि सुपरपावर को भी रास्ता बदलना पड़ा?
अमेरिका का बहुत ताकतवर युद्धपोत USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश निमिट्ज-क्लास का सुपरकैरीयर है. ऐसा लगता है कि लाल सागर के खतरनाक समुद्री रास्ते से बचने के लिए अफ्रीका का लंबा चक्कर लगा रहा है. इस जंगी जहाज को उस समय ईरान के करीब ले जाने का फैसला किया गया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका अपनी नौसेना बढ़ा रहा है और तनाव बना हुआ है.
USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश ने कौन सी राह पकड़ी?
इस हफ्ते इस परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर को नामीबिया के तट के पास देखा गया. यह अफ्रीका के दक्षिणी छोर से घूमकर केप ऑफ गुड होप के रास्ते अटलांटिक महासागर से हिंद महासागर में जाएगा. माना जा रहा है कि यह जहाज मिडिल ईस्ट जा रहा है, जहां यह USS अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ेगा, जो फरवरी से वहां तैनात है. आमतौर पर अमेरिका के पूर्वी तट से आने वाले जहाज जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से होते हुए भूमध्य सागर, फिर स्वेज नहर और रेड सी के रास्ते मध्य पूर्व पहुंचते हैं.
कितना लंबा हो गया सफर?
अगर यह जहाज नॉरफॉक से लाल सागर के रास्ते अरब सागर जाता, तो दूरी लगभग 8,000 से 9,000 नॉटिकल माइल होती. लेकिन अब अफ्रीका के रास्ते जाने पर यह दूरी बढ़कर 13,000 से 15,000 नॉटिकल माइल हो गई है, यानी लगभग 1.5 गुना ज्यादा लंबा सफर. साफ है कि खतरा इतना बड़ा है कि अमेरिका को भी अपना रास्ता बदलना पड़ा.













