ईरान में 175 बच्चियों की मौत के लिए US आर्मी जिम्मेदार, पुराना डेटा लेकर स्कूल पर दागी टॉमहॉक मिसाइल- रिपोर्ट

Iran School Strike: दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित लड़कियों के स्कूल पर 28 फरवरी को हमला हुआ था. इस हमले में 175 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर बच्चियां थीं.

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Iran School Strike: ईरान में मिनाब के स्कूल पर 28 फरवरी को हमला हुआ था

Iran School Strike: अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ जंग छेड़ रखी है. लेकिन 12 दिन गुजर जाने के बाद भी कोई ऐसी पुख्ता सफलता हाथ नहीं लगी है जिसके दम पर कहा जाए कि यह जंग जीत ली गई है. हालांकि दूसरी तरफ अमेरिकी सेना और उसके ऑर्डर देने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सबसे बड़ा धब्बा लगा है कि हमला ईरान में लड़कियों के एक स्कूल पर भी किया गया. इस हमले में 175 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर बच्चियां थीं. अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की सेना की जांच में पाया गया है कि ईरान के मिनाब में प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले के लिए अमेरिका की सेना ही जिम्मेदार है. 

अमेरिकी सेना की जांच में क्या पता चला है?

चल रही सैन्य जांच में पाया गया है कि 28 फरवरी को शजराह तैय्यबेह प्राइमरी स्कूल की इमारत पर टॉमहॉक मिसाइल से हमला इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिकी सेना से निशाना तय करने में गलती हो गई थी. ध्यान रहे कि इस युद्ध में शामिल देशों में अकेला अमेरिका ही ऐसा देश है जो टॉमहॉक मिसाइल का इस्तेमाल करता है.

अब सवाल कि अमेरिकी सेना से मिसाइल हमला के लिए टारगेट सेट करने में इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि टारगेट कहां है, इसके लिए जो कोऑर्डिनेट तय किया गया था, वह अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुराने डाटा का इस्तेमाल करके बनाए थे. यह डाटा डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने दिया था. इसके अलावा, जांच में नेशनल जियोस्पेशियल-इंटेलिजेंस एजेंसी के काम की भी जांच की जा रही है, जो संभावित लक्ष्यों की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करती है.

अधिकारियों ने कहा कि यह जांच अभी भी चल रही है कि आखिर इस जानकारी (पुराने डाटा) को दोबारा जांचकर पक्का क्यों नहीं किया गया.

यह भी ध्यान रहे कि स्कूल उसी इलाके में है जहां ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी का ठिकाना है. इसलिए यह जगह अमेरिकी सेना के एक महत्वपूर्ण सैन्य लक्ष्य के बहुत पास थी. शुरुआत में यह इमारत स्कूल नहीं थी और सैन्य अड्डे का हिस्सा थी, लेकिन 2013 से 2016 के बीच इस जगह को घेरकर स्कूल बना दिया गया था. यानी कम से कम 10 साल से इस इमारत में स्कूल चल रहा था.

जांच में यह भी देखा गया कि कहीं निशाना तय करने में हुई गलती के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डाटा एनालिसिस प्रोग्राम या तकनीकी खुफिया जानकारी जिम्मेदार तो नहीं थे. लेकिन अधिकारियों ने कहा कि यह गलती शायद इंसानों से हुई है.

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ट्रंप ने तो ईरान पर ही दोष मढ़ा

हालांकि दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस स्कूल पर हमले के लिए खुद ईरान जिम्मेदार है. शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था, “हमें लगता है कि यह हमला ईरान ने किया, क्योंकि आप जानते हैं कि उनके हथियार बहुत गलत निशाना लगाते हैं. उनके पास बिल्कुल भी सटीकता नहीं है.”

रविवार को ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो में दिखाया गया कि मिसाइल रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े कैंपस में एक इमारत से टकराती है. युद्ध शुरू होने के बाद से एक साथ सबसे ज्यादा नागरिकों की मौत इसी हमले में हुई थी. इसपर तुरंत ही संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आलोचना की थी. वॉशिंगटन स्थित गैर-लाभकारी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ वकील एलिस बेकर ने कहा कि स्कूलों को निशाना बनाना सशस्त्र संघर्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों का साफ उल्लंघन है.

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