- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होने की उम्मीद जताई है
- ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ हमले के लिए शक्तिशाली जंगी जहाज हैं लेकिन उनका इस्तेमाल न होना बेहतर होगा
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची आज तुर्की जाकर वार्ता के माध्यम से अमेरिकी हमले को रोकने का प्रयास करेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी सेना को ईरान पर हमला करने का ऑर्डर देंगे या नहीं? यह सवाल सबकी जुबान पर है और जवाब शायद खुद ट्रंप को क्लियर नहीं है. एक बार फिर उन्होंने सैन्य हमले की चेतावनी देने के बाद नरमी का संकेत दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार, 29 जनवरी (स्थानीय समयानुसार) को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी. साथ ही उन्होंने संभावित परमाणु समझौते पर तेहरान के साथ आगे बातचीत करने की योजना बनाई है.
ट्रंप ने अपनी पत्नी मेलानिया के बारे में एक डॉक्यूमेंट्री के प्रीमियर पर रिपोर्टरों से कहा, "मैंने अपने पहले कार्यकाल में सेना को तैनात किया था, और अब हमारा एक ग्रूप (सेना का) ईरान नाम के स्थान पर जा रहा है, और उम्मीद है कि हमें इसका उपयोग नहीं करना पड़ेगा." यह पूछे जाने पर कि क्या वह ईरान के साथ बातचीत करेंगे, ट्रंप ने कहा, "मैंने बातचीत की है और मैं इस पर योजना बना रहा हूं. हां, हमारे पास अभी ईरान के लिए बहुत बड़े, बहुत शक्तिशाली जंगी जहाज हैं, और यह बहुत अच्छा होगा अगर हमें उनका उपयोग न करना पड़े."
ईरान भी अमेरिकी हमला से बचना चाहता है
ईरान के विदेश मंत्री, अब्बास अराघची अमेरिकी हमले को रोकने के उद्देश्य से वार्ता के लिए तुर्की की राजधानी अंकारा की यात्रा करेंगे. तुर्की तेहरान को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि अगर संभावित जंग टालनी है तो उसे अमेरिका को अपने परमाणु कार्यक्रम पर रियायतें देनी होंगी. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच एक वीडियो कॉन्फ्रेंस का प्रस्ताव रखा था. पिछले एक दशक से दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक सीधी बातचीत नहीं हुई है.
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने गुरुवार को एक कैबिनेट बैठक में कहा कि उनका विभाग ट्रंप द्वारा दिए गए किसी भी सैन्य निर्देश को पूरा करने में सक्षम होगा. उन्होंने कहा, "उनके (ईरान) पास समझौते के लिए सभी विकल्प हैं. उन्हें परमाणु क्षमताओं (हथियार बनाने) का पीछा नहीं करना चाहिए. और यह राष्ट्रपति जो भी अपेक्षा करेंगे हम उसे पूरा करने के लिए तैयार रहेंगे."













