अमेरिका और ईरान ने कौन-कौन से हथियार कहां-कहां जमा कर रखे हैं? मैप और ग्राफिक्स से समझिए

शनिवार को इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर दिया. इस हमले में ईरान में भारी नुकसान पहुंचा है. ईरान ने भी जवाबी हमला करते हुए इजरायल सहित मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी आर्मी बेस कैंपों को निशाना बनाया.

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ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात.
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  • शनिवार को इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया है. इस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया है.
  • ईरान ने इजरायल के साथ-साथ मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया.
  • मध्य पूर्व में अमेरिका के कम से कम 19 सैन्य ठिकाने हैं जिनमें बहरीन, कतर, UAE और कुवैत के बड़े आधार शामिल हैं.
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शनिवार को इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर जोरदार हमला किया. राजधानी तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर मिसाइल गिराए गए. इजरायली डिफेंस फोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हमले की जानकारी दी. इन हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू की. ईरान ने इजरायल के साथ-साथ मिडिल ईस्ट में मौजूद में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया. ईरान की ओर से दागे गए मिसाइलों ने मिडिल ईस्ट के 7 देशों के अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया. इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में एक और जंग जैसे हालात बन गए हैं. जंग के इस हालात के बीच आईए जानते हैं अमेरिका, ईरान ने कौन-कौन से हथियार कहां-कहां जमा कर रखे हैं. 

ईरान में 40 छात्राओं की मौत, ईरान ने दागी 400 मिसाइलें

इजरायल और अमेरिका के हमले में दक्षिणी ईरान में 40 छात्राओं की मौत हो गई. जबकि 45 घायल हैं. इरना न्यूज एजेंसी ने इसकी जानकारी दी. इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पलटवार करते हुए करीब 400 मिसाइलें दागीं हैं. ईरान ने इजराइल के अलावा कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी बेस पर भी हमला किया है.

चलिए आपको यहां ग्राफिक्स के जरिए बताते हैं कि दोनों देशों ने कितनी और कहां सैन्य तैयारी कर ली है. साथ ही दोनों की कुल सैन्य ताकत को भी तौलेंगे.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की तैनाती

पेंटागन ने पिछले हफ्तों में मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अपना स्ट्राइक फोर्स बहुत मजबूत कर दिया है. एएफफी की रिपोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि फिलहाल मध्य पूर्व में अमेरिका के कुल 13 युद्धपोत तैनात हैं. इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन, नौ डिस्ट्रॉयर और तीन लिटोरल कॉम्बैट शिप शामिल हैं.

इसी बीच दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड इस समय अटलांटिक महासागर में मौजूद है और कैरेबियन सागर से होते हुए मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे तैनात करने का आदेश दिया था. इस कैरियर के साथ तीन डिस्ट्रॉयर भी चल रहे हैं.

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नोट- एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) एक विशाल युद्धपोत होता है जो समुद्र में एक तैरते हुए हवाई अड्डे के रूप में काम करता है. यह जहाजों का एक ऐसा बेड़ा है जहां से लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकते हैं और सुरक्षित रूप से उतर सकते हैं.

मध्य पूर्व में एक ही समय पर दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी को असाधारण माना जाता है. इन विशाल युद्धपोतों पर दर्जनों आधुनिक लड़ाकू विमान तैनात होते हैं और हजारों नौसैनिक सेवाएं देते हैं. पिछले साल जून में भी अमेरिका ने इसी तरह दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर इस क्षेत्र में तैनात किए थे. उस समय इजरायल द्वारा किए गए 12 दिन के सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे. इन एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ कई फाइटर जेट, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य युद्धक उपकरण भी तैनात किए जा चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो उसके पास सैन्य दृष्टि से भारी बढ़त होगी, खासकर इजरायल के समर्थन के कारण.

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एएफफी की रिपोर्ट के अनुसार ओपन सोर्स सूचनाओं और फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के डेटा से संकेत मिलता है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं. इनमें F-22 रैप्टर स्टील्थ फाइटर जेट, F-15 और F-16 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं. इनके साथ KC-135 हवा में ईंधन भरने वाले विमान भी भेजे गए हैं, जो लंबी दूरी और लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.

बुधवार को फ्लाइटरडार24 पर यह देखा गया कि कई KC-135 विमान मिडिल ईस्ट के आसपास या उसके ऊपर उड़ान भर रहे थे. इसके अलावा E-3 सेंट्री एयरबोर्न चेतावनी और नियंत्रण विमान भी इस क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दिए. साथ ही, सैन्य आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स के लिए इस्तेमाल होने वाले मालवाहक विमान भी लगातार इस इलाके में उड़ानें भरते नजर आए.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य ठिकाने

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कम से कम 19 सैन्य ठिकाने हैं- कुछ स्थायी और कुछ अस्थायी. काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशन के अनुसार यहां अमेरिका के कुल 8 स्थायी अड्डे हैं- बहरीन, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित.

अमेरिका के मिडिल ईस्ट में कुछ बड़े बेस हैं:

A) अल उदीद एयर बेस (कतर) - मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा, 1996 में स्थापित

  • 60 एकड़
  • लगभग 100 विमान यहां तैनात
  • बेस में लगभग 10,000 सैनिक रहते हैं
  • इराक, सीरिया और अफगानिस्तान में संचालन के लिए केंद्रीय
     

B) कैंप आरिफजान (कुवैत)- 1999 में निर्मित. यह मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए रसद, आपूर्ति और कमांड केंद्र के रूप में काम करता है.

C) अल-धफरा एयरबेस (UAE)- यह सामरिक आधार टोही, खुफिया जानकारी जुटाने और फाइटर जेट्स के हवाई अभियानों को सपोर्ट करता है. बेस में F-22 रैप्टर स्टील्थ लड़ाकू विमान और ड्रोन और AWACS सहित विभिन्न निगरानी विमान जैसे एडवांस विमान मौजूद.

D) एरबिल एयर बेस (इराक)- सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस (PSAB) को क्षेत्रीय खतरों, विशेषकर ईरान से आने वाले खतरों का मुकाबला करने के लिए 2019 में अमेरिकी सेना द्वारा फिर से सक्रिय किया गया था. 

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E) ऐन अल-असद- यह इराक में सबसे बड़े अमेरिकी ठिकानों में से एक

ईरान भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए तैयार

ईरान ने गुरुवार को चेतावनी दी कि यदि अमेरिका हमला करता है तो उसके लिए तमाम अमेरिकी अड्डे 'वैध लक्ष्य' होंगे यानी वह उनपर हमला शुरू कर देगा. संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूत अमीर सईद इरावानी ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में यह बात कही है. 

 ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जिनकी रेंज 1000 से 2000 किलोमीटर तक पहुंचती है. उदाहरण के तौर पर, देज़फूल (1000 किमी तक मार), फतह-1/हज कासिम खैबर शेखान (1400 किमी तक मार) और खोरमशहर/सैजिल (2000 किमी तकमार) जैसी मिसाइलें ईरान को पूरे मिडिल ईस्ट और पूर्वी भूमध्य सागर तक मार करने की ताकत देती हैं. 

जंग की सूरत में ईरान मुख्य रूप से उन अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है जहां उसके कर्मी तैनात हैं या सहयोगी बलों के आधार हैं- जैसे कि कुवैत, बहरीन, कतर और यूएई में मौजूद अमेरिकी अड्डे. ध्यान रहे कि अमेरिका तक ईरान की सीधी बैलिस्टिक मिसाइल पहुंचना आसान नहीं है, फिर भी ईरान के सहयोगी समूह जैसे हिजबुल्लाह या विभिन्न प्रॉक्सी नेटवर्क अमेरिका के पार्टनर देशों पर अप्रत्यक्ष हमलों को एक विकल्प मान सकते हैं.

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