US Iran Ceasefire Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'सभ्यता ही खत्म' करने की धमकी दे दी थी. समझौता करने या तबाही झेलने के लिए ट्रंप ने जो डेडलाइन (भारत में सुबह के 5.30 बजे) दी थी, वह नजदीक आती जा रहा थी. भारत में अभी सुरज उगा नहीं था और पूरी दुनिया की नजर घड़ी पर थी. अब क्या होगा... और ठीक समय पर एक समझौता हुआ और पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली.
एक तरफ अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अड़ा ईरान और दूसरी तरफ दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका- दोनों एक महीने से ज्यादा समय से लड़ रहे थे. राहत इस बात की थी कि डोनाल्ड ट्रंप की “पूरी एक सभ्यता को मिटा देने” वाली धमकी खत्म होने से सिर्फ 90 मिनट पहले दोनों देश सीजफायर पर सहमत हो गए. अब खबर आई है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने इस डील में बड़ी भूमिका निभाई. एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार मुजतबा खामेनेई ने अपने वार्ताकारों को समझौते की ओर बढ़ने को कहा.
उन आखिरी घंटों में पर्दे के पीछे क्या हुआ?
जब ट्रंप सार्वजनिक रूप से बड़े पैमाने पर विनाश की धमकी दे रहे थे, उसी समय पर्दे के पीछे बातचीत तेज हो रही थी. मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना और पेंटागन के अधिकारी आखिरी घंटों में ईरान के ढांचे पर बड़े बमबारी अभियान की तैयारी कर रहे थे. साथ ही वे यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि ट्रंप का अंतिम फैसला क्या होगा. खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देश भी ईरान की बड़ी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हो रहे थे.
इसके बाद दिन भर कई संशोधन होते रहे. पाकिस्तानी मध्यस्थ नए मसौदे स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच पहुंचाते रहे. मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्री भी मतभेद कम कराने की कोशिश कर रहे थे. सोमवार देर रात मध्यस्थों को दो हफ्ते के युद्धविराम के नए प्रस्ताव पर अमेरिका की मंजूरी मिल गई.
फैसला मुजतबा के हाथ में था
अब फैसला मुजतबा खामेनेई को करना था, जो सुप्रीम लीडर बनने के बाद से अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. बताया गया कि वे सोमवार और मंगलवार को पूरी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे. रिपोर्ट के अनुसार, अपने वार्ताकारों को समझौते की अनुमति देना एक “बड़ी सफलता” थी. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अहम भूमिका निभाई. उन्होंने बातचीत संभाली और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडरों को समझौता स्वीकार करने के लिए राजी किया.
चीन ने भी ईरान को तनाव कम करने की सलाह दी. लेकिन आखिरी फैसला सिर्फ मुजतबा खामेनेई का था. दो दिन चली तीखी बातचीत के दौरान सभी बड़े फैसले उन्हीं के जरिये लिए गए. एक क्षेत्रीय सूत्र के अनुसार, “उनकी हरी झंडी के बिना कोई समझौता नहीं होता.”
फिर ट्रंप की धमकी
मंगलवार सुबह तक साफ हो गया था कि प्रगति हो रही है. फिर भी डोनाल्ड ट्रंप ने एक डरावनी चेतावनी दी कि “आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी.” कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान बातचीत छोड़ रहा है, लेकिन बातचीत से जुड़े सूत्रों ने कहा कि ऐसा नहीं है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस हंगरी से फोन पर बातचीत कर रहे थे और मुख्य रूप से पाकिस्तानियों से संपर्क में थे.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पूरे दिन ट्रंप और उनकी टीम के संपर्क में थे, हालांकि इजरायल को लग रहा था कि वे बातचीत की प्रक्रिया पर नियंत्रण खो रहे हैं. मंगलवार दोपहर (अमेरिकी समयानुसार) तक यह सहमति बन गई कि समझौता होने वाला है.
कुछ घंटों बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने एक्स पर युद्धविराम की शर्तें साझा कीं और दोनों पक्षों से इसे स्वीकार करने की अपील की. ट्रंप ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: “मैं दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने के लिए सहमत हूं.” इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बात की और समझौते को अंतिम रूप दिया.
शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार को इस्लामाबाद में बैठक के लिए आमंत्रित किया है. ट्रंप के पोस्ट के 15 मिनट बाद अमेरिकी सेना को कार्रवाई रोकने का आदेश मिल गया. इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान युद्धविराम का पालन करेगा. फिलहाल सब कुछ ठीक दिखाई दे रहा है.














