होर्मुज में अब 'महायुद्ध'! अमेरिका ने अपने सबसे खतरनाक मरीन कमांडो को उतारा, क्या शुरू होगा ग्राउंड ऑपरेशन

अमेरिका ने इसके साथ 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को भी वेस्ट एशिया भेजा है. इस यूनिट का बेस जापान के ओकिनावा में है. यह यूनिट जमीन और हवा दोनों से हमला करने में सक्षम है.

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  • मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका ने मरीन कमांडो को सक्रिय रूप से क्षेत्र में तैनात किया है.
  • यूएसएस त्रिपोली नामक एम्फिबीयस स्ट्राइक ग्रुप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ओर भेजा गया है.
  • पेंटागन 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को भी तैनात किया जा रहा है जो अचानक हमले में सक्षम मानी जाती है.
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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष आने वाले दिनों में और भी अधिक विनाशकारी और भयावह रूप ले सकता है. पिछले करीब दो हफ्तों से चल रही इस भीषण जंग में जान-माल के भारी नुकसान के बाद, अब युद्ध की स्थिति एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. इस बिगड़ते हालात और लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अब सीधे तौर पर हस्तक्षेप करते हुए अपने घातक मरीन कमांडो को मैदान में उतार दिया है. अमेरिकी सेना की इस सक्रिय भागीदारी के बाद इस बात की आशंका प्रबल हो गई है कि यह क्षेत्रीय तनाव अब एक पूर्ण वैश्विक सैन्य टकराव में तब्दील हो सकता है.

अमेरिका ने अपना एमफिबीयस स्ट्राइक ग्रुप यूएसएस त्रिपोली को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इलाके की ओर भेजा है. यह जहाज पानी और जमीन दोनों जगह ऑपरेशन कर सकता है. इस बेड़े में करीब 2500 मरीन  कमांडो शामिल हैं. ये सैनिक जमीनी लड़ाई और तेज हमले के लिए जाने जाते हैं. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कि अमेरिका अब अपने पैदल सैनिकों को भी जंग में उतार सकता है.

पेंटागन 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को भी तैनात कर रहा

जानकारी के मुताबिक मरीन कमांडो के साथ अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को भी तैनात कर रहा है. यह यूनिट अचानक हमला करने और तेजी से जवाब देने में माहिर मानी जाती है. अभी यूएसएस त्रिपोली जापान में तैनात है. माना जा रहा है कि वहां से यह एक से दो हफ्तों में यह अमेरिका की सेंट्रल कमांड के इलाके में पहुंच जाएगा. पश्चिम एशिया में पहले से ही अमेरिका के 50 हजार से ज्यादा सैनिक मौजूद हैं. इस नई तैनाती से उसकी सैन्य ताकत और इजाफा हो जाएगा.

क्या है यूएसएस त्रिपोली?

यूएसएस त्रिपोली अमेरिकी नौसेना का बड़ा हमला करने वाला जहाज है. इसके साथ एक गाइडेड मिसाइल क्रूजर यूएसएस रोबर्ट स्मॉल्स और एक डिस्ट्रॉयर यूएसएस राफेल पेरालता भी शामिल हैं. क्रूजर बड़े जंगी जहाज होते हैं. इनमें भारी हथियार और हेलीकॉप्टर होते हैं. यह डिस्ट्रॉयर आकार में थोड़े छोटे होते हैं. इनका काम बेड़े की सुरक्षा करना होता है. ये पनडुब्बियों के खिलाफ मिशन में भी माहिर होते हैं.

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क्या अमेरिका ईरान में सैनिक उतारने की तैयारी कर रहा? 

अमेरिका ने इसके साथ 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को भी वेस्ट एशिया भेजा है. इस यूनिट का बेस जापान के ओकिनावा में है. यह यूनिट जमीन और हवा दोनों से हमला करने में सक्षम है. साथ ही लॉजिस्टिक और राहत मिशन भी कर सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ईरान में सैनिक उतारने की तैयारी कर रहा है. आने वाले दिनों में स्थिति और साफ हो सकती हैं. वैसे जानकर मानते हैं कि ईरान के जमीन पर सैनिक उतारकर कोई भी ऑपेरशन को अंजाम देना काफी मुश्किल काम होगा. इस कार्रवाई में अमेरिका को  खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है, ऐसे में बड़ा सवाल उठता है क्या अमेरिका इसके लिये तैयार है ? क्योंकि अतीत में उसके अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं.

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